पर्व / विवाह पंचमी 1 दिसंबर को, इस दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति से बन रहे हैं शुभ योग

Vivah Panchami on 1 December
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Vivah Panchami on 1 December

मार्गशीर्ष माह के शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को श्रीराम-सीता का विवाह करवाने से दूर होती है परेशानियां

Dainik Bhaskar

Nov 28, 2019, 03:28 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क. श्रीराम-सीता के विवाह का महापर्व विवाह पंचमी 1 दिसंबर रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थिति से शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन चंद्रमा श्रवण नक्षत्र के साथ मकर राशि में, सूर्य वृश्चिक राशि में, गुरु धनु राशि में, राहु मिथुन राशि में रहेंगे। ज्योतिषाचार्य पं प्रवीण द्विवेदी के अनुसार रविवार को गोचर यानी आकाश मंडल में स्वराशि स्थित बृहस्पति तथा चंद्रमा से एकादश सूर्य लाभ भाव में होने से इस मुहूर्त की शुद्धता को बढ़ाएंगे। वहीं चंद्रमा का स्वयं के नक्षत्र श्रवण में होना शुभ है। शुभ ग्रहों की प्रधानता होने के कारण यह दिन मांगलिक कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ रहेगा। 

  • 3 शुभ योगों में सूर्योदय

रविवार को सूर्य-चंद्रमा की स्थिति से वृद्धि और रवियोग योग बन रहे हैं। वहीं तिथि, वार और नक्षत्र के संयोग से सुबह लगभग 10 बजे तक सर्वार्थसिद्धि योग भी रहेगा। इन शुभ योगों में सूर्योदय होने से मांगलिक कार्यों के लिए पूरा दिन श्रेष्ठ रहेगा। पूर्णा तिथि होने से मांगलिक कार्य पूर्ण होंगे।

  • अंक ज्योतिष में भी शुभ है यह तिथि 

अंक ज्योतिष में भी यह तिथि काफी शुभ है। रविवार का मूलांक 1 है जो सूर्य देव का अंक है। दिन और अंक का शुभ संयोग बनने से सभी मुहूर्तों में सूर्य का प्रभाव रहेगा। इस दिन किया गया कार्य शुभ फल देगा। प्रभु श्री राम चेतना के प्रतीक हैं और माता सीता शक्ति की प्रतीक हैं। चेतना और प्रकृति के मिलन से यह दिन काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। इस दिन भगवान राम और माता सीता का विवाह करना शुभ माना जाता है।

  • श्रीराम-सीता विवाह से दूर होती हैं परेशानियां

पं द्विवेदी के अनुसार जिनकी शादी में अड़चनें आ रही हों और जिन दंपतियों के जीवन में परेशानियां चल रही हों, उन्हें पंचमी को श्रीराम और माता सीता का विवाह करवाना चाहिए। इस दिन रामचरित मानस और बालकांड में भगवान श्री राम और माता सीता के विवाह प्रसंग का पाठ करना शुभ माना गया है। सीता स्वयंवर में प्रभु श्री राम ने शिव धनुष को भंग किया था। इसके बाद राजा जनक ने अयोध्या में अपने दूत भेजे थे और राजा दशरथ से बारात लाने का आग्रह किया था। इसके बाद पंचमी के दिन प्रभु श्री राम और माता सीता का विवाह हुआ था।

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