13 जून को निर्जला एकादशी / भगवान विष्णु के लिए रखा जाता है ये व्रत, भोग में रखें तुलसी के पत्ते, घर में क्लेश न करें

Dainik Bhaskar

Jun 12, 2019, 01:08 PM IST


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  • मान्यता- निर्जला एकादशी के व्रत से मिलता है सालभर की सभी एकादशियों के व्रत का पुण्य

जीवन मंत्र डेस्क। गुरुवार, 13 जून को निर्जला एकादशी है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल की एकादशी का महत्व काफी अधिक है। इस एकादशी को निर्जला, पांडव और भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस तिथि पर भगवान विष्णु के लिए व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि इस एक दिन के व्रत से सालभर की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य फल मिलता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार जानिए निर्जला एकादशी से जुड़ी खास बातें...

निर्जला एकादशी से जुड़ी खास बातें

  1. क्यों कहते हैं निर्जला एकादशी

    इस तिथि पर  निर्जल रहकर यानी बिना पानी पिए व्रत किया जाता है, इसीलिए इसे निर्जला एकादशी कहा जाता है। व्रत करने वाले भक्त पानी भी नहीं पीते हैं। सुबह-शाम भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और अगले दिन द्वादशी तिथि पर पूजा-पाठ और ब्राह्मण को भोजन करवाने के बाद खुद भोजन ग्रहण करते हैं।

  2. श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया था एकादशियों का महत्व

    18 पुराणों में से एक स्कंद पुराण में एकादशी महात्म्य नाम का अध्याय है, इसमें सालभर की सभी एकादशियों की जानकारी दी गई है। इस अध्याय में श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को एकादशियों का महत्व बताया है। निर्जला एकादशी के संबंध में पांडव पुत्र भीम से जुड़ी कथा प्रचलित है।

  3. महाभारत काल में भीम ने रखा था ये व्रत

    महर्षि वेदव्यास पांडवों को चारों पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देने वाली एकादशी व्रत का संकल्प करवा रहे थे। तब भीम ने वेदव्यास से कहा कि पितामाह, आपने एक माह में दो एकादशियों के उपवास की बात कही है। मैं एक दिन तो क्या, एक समय भी खाने के बिना नहीं रह सकता हूं। मैं दिन में कई बार भोजन करता हूं। इस वजह से मैं एकादशी व्रत का पुण्य प्राप्त नहीं कर संकूगा।
    वेदव्यास ने भीम से कहा कि पूरे वर्ष में सिर्फ एक एकादशी ऐसी है जो वर्षभर की सभी एकादशियों का पुण्य दिला सकती है। वह एकादशी है ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी। भीम तुम इस एकादशी का व्रत करो। इसके बाद भीम निर्जला एकादशी का व्रत करने के लिए तैयार गए। इसीलिए इसे पांडव एकादशी या भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है।

  4. निर्जला एकादशी पर क्या करें

    निर्जला एकादशी पर पानी के बिना व्रत करने का नियम है। अगर ये संभव ना हो तो इस दिन फलाहार और दूध का सेवन करके भी व्रत किया जा सकता है। सुबह जल्दी उठकर नहाने के बाद भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प करें। अपने नाम और गौत्र बोलकर निर्जला एकादशी व्रत करने का संकल्प करना चाहिए।
    भगवान विष्णु की पूजा सुबह-शाम करें, मंत्रों का जाप करें। अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर ब्राह्मण को खाना खिलाएं, दान करें। इसके बाद भोजन करना चाहिए।

  5. निर्जला एकादशी पर क्या न करें

    इस दिन तुलसी और बिल्व पत्र नहीं तोड़ना चाहिए। भगवान के भोग के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लेना चाहिए या फिर तुलसी के गिरे हुए पत्तों को साफ जल से धोकर पूजा में उपयोग कर सकते हैं।
    एकादशी पर चावल भूलकर भी नहीं खाना चाहिए। घर में क्लेश न करें। प्रेम से रहें। जिन घरों में अशांति होती है, वहां देवी-देवताओं की कृपा नहीं होती है। किसी भी प्रकार के नशे से बचें। अधार्मिक कामों से दूर रहें। एकादशी पर सुबह देर तक न सोएं। दिन में और शाम को भी नहीं सोना चाहिए।

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