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तीज-त्योहार / निर्जला एकादशी का उपवास बताता है जल का महत्व, महाभारत काल में भीम ने किया था यह व्रत



Nirjala Ekadashi Puja Vidhi, Nirjala Ekadashi Vrat Kaise Kare - 2019 Nirjala Ekadashi What To Do and What Not To Do
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Nirjala Ekadashi Puja Vidhi, Nirjala Ekadashi Vrat Kaise Kare - 2019 Nirjala Ekadashi What To Do and What Not To Do

Dainik Bhaskar

Jun 10, 2019, 01:00 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क. सालभर में आने वाली सभी 24 एकादशियों में सबसे बड़ी, महत्वपूर्ण और कठिन निर्जला एकादशी मानी गई है। इस साल निर्जला एकादशी 13 जून को आ रही है। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन आने वाली निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है, क्योंकि महाभारत काल में इसे भीम ने किया था। यह व्रत मन में जल संरक्षण की भावना को उजागर करता है। व्रत से जल की वास्तविक अहमियत का भी पता चलता है। इस उपवास में सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक पानी भी नहीं पिया जाता है। निर्जल यानी बिना पानी का ये व्रत निर्जला एकादशी कहलाता है।

 

  • कैसे करें यह पूजा 

निर्जला एकादशी के दिन पूरे समय ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का मानसिक जाप करते रहना चाहिए। द्वादशी के दिन व्रत का पारण किया जाता है। इसमें यथायोग्य ब्राह्मणों, गरीबों को दान करके व्रत खोला जाता है। इस दिन व्रत करने के अलावा जप, तप गंगा स्नान आदि कार्य करना शुभ रहता है। इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करके व्रत कथा अवश्य सुनना चाहिए। 

 

  • करें मीठे जल का वितरण 

पद्मपुराण के अनुसार निर्जला एकादशी व्रत के प्रभाव से जहां मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूर्णहोती हैं, वहीं अनेक रोगों की निवृत्ति एवं सुख सौभाग्य में वृद्धि होती है। मान्यता है कि इस एकादशी को करने से वर्ष की 24 एकादशियों का व्रत रखने के समान फल मिलता है। व्रत करने वाले साधक के लिए जल का सेवन करना निषेध है परंतु इस दिन मीठे जल का वितरण करना सर्वाधिक पुण्यकारी है।

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