नीतिसार / दरिद्र होकर दाता नहीं बनना चाहिए, वरना परेशानियां बढ़ सकती हैं

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  • गरुड़ में बताया गया है कि धनी व्यक्ति को दूसरों की मदद करने में कंजूसी नहीं करनी चाहिए, वरना मान-सम्मान नहीं मिलता है

दैनिक भास्कर

Aug 13, 2019, 04:53 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। गरुड़ पुराण के आचारकांड में नीतिसार नाम का अध्याय है। इस अध्याय की एक नीति में मान-सम्मान, सुखी-समृद्धि पाने के लिए 5 कामों से बचने के लिए कहा गया है। जो लोग इन कामों को करते हैं, उन्हें घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान नहीं मिल पाता है। जानिए ये 5 काम कौन-कौन से हैं...
संक्षिप्त गरुड़ पुराण के आचार कांड में लिखा है कि-
दाता दरिद्र: कृपणोर्थयुक्त: पुत्रोविधेय: कुजनस्य सेवा।
परापकारेषु नरस्य मृत्यु: प्रजायते दुश्चरितानि पञ्च।।
दरिद्र होकर दाता बनना

आय कम होने पर या धन अभाव होने पर भी बिना सोच-समझे दान करने वाले लोग हमेशा दुखी रहते हैं। इस काम से बचना चाहिए। कभी भी अपने सामर्थ्य से ज्यादा दान नहीं करना चाहिए।
धन होने पर कंजूस बने रहना
इस नीति के अनुसार जो लोग धनी हैं, लेकिन कंजूस बने रहते हैं, जरूरतमंद लोगों की मदद नहीं करते हैं, हमेशा पैसा बचाने के लिए सोचते हैं, उन्हें घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान नहीं मिल पाता है।
संतान का संस्कारी न होना
अगर माता-पिता अपनी संतान को अच्छे संस्कार नहीं देंगे तो उन्हें समाज में अपमानित होना पड़ सकता है। संतान का अच्छे कर्म और विचारों के बीच ही पालन-पोषण करना चाहिए। ऐसा करने पर प्रतिष्ठा और सम्मान में बढ़ोतरी होती है।
अधर्मी लोगों के साथ रहना
अच्छी या बुरी संगत का सीधा असर हमारे जीवन पर होता है। इसलिए बुरे और अधर्मी लोगों की संगत से बचना चाहिए। वरना गलत संगत की वजह से कहीं भी मान-सम्मान नहीं मिल पाता है।
खुद के लाभ के लिए दूसरों को नुकसान पहुंचाना
निजी लाभ के लिए दूसरों का बुरा करने वाले लोग समाज में कभी भी मान-सम्मान हासिल नहीं कर पाते हैं। ऐसे कामों की वजह से पूरे परिवार को हानि हो सकती है।

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