व्रत-उपवास / परिवर्तिनी एकादशी, इस व्रत को करने से मिलता है वाजपेय यज्ञ का फल



Parivartini Ekadashi 2019 by This Fast Get By Blessings of Vajpayee Yagya
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Parivartini Ekadashi 2019 by This Fast Get By Blessings of Vajpayee Yagya

Dainik Bhaskar

Sep 07, 2019, 07:35 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क. हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जलझूलनी एकादशी कहते हैं। इसे परिवर्तिनी एकादशी व डोल ग्यारस आदि नामों से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान वामन की पूजा की जाती है। इस बार यह एकादशी 9 सितंबर, सोमवार को है। इस दिन भगवान योग निद्रा के दौरान करवट लेते हैं, इसलिए इसको परिवर्तिनी एकादशी कहते हैं। कुछ स्थानों पर ये दिन भगवान श्रीकृष्ण के सूरज पूजा (जन्म के बाद होने वाला मांगलिक कार्यक्रम) के रूप में मनाया जाता है।

परिवर्तिनी यानी जल झूलनी एकादशी व्रत की विधि और महत्व

  1. व्रत की विधि

    • परिवर्तिनी एकादशी व्रत का नियम पालन दशमी तिथि (8 सितंबर, शनिवार) की रात से ही शुरू करें व ब्रह्मचर्य का पालन करें। एकादशी के दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनकर भगवान वामन की प्रतिमा के सामने बैठकर व्रत का संकल्प लें। इस दिन यथासंभव उपवास करें उपवास में अन्न ग्रहण नहीं करें संभव न हो तो एक समय फलाहारी कर सकते हैं।
    • इसके बाद भगवान वामन की पूजा विधि-विधान से करें। (यदि आप पूजन करने में असमर्थ हों तो पूजन किसी योग्य ब्राह्मण से भी करवा सकते हैं।) 
    • भगवान वामन को पंचामृत से स्नान कराएं। स्नान के बाद उनके चरणामृत को व्रती (व्रत करने वाला) अपने और परिवार के सभी सदस्यों के अंगों पर छिड़कें और उस चरणामृत को पीएं। 
    • इसके बाद भगवान को गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि पूजन सामग्री अर्पित करें। 
    • विष्णु सहस्त्रनाम का जाप एवं भगवान वामन की कथा सुनें। 
    • रात को भगवान वामन की मूर्ति के समीप ही सोएं और दूसरे दिन यानी द्वादशी पर वेदपाठी ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान देकर आशीर्वाद प्राप्त करें।

  2. जानिए परिवर्तिनी एकादशी व्रत का महत्व

    • धर्म ग्रंथों के अनुसार, जो मनुष्य यत्न के साथ विधिपूर्वक परिवर्तिनी एकादशी व्रत करते हुए रात्रि जागरण करते हैं, उनके समस्त पाप नष्ट होकर अंत में वे स्वर्गलोक को प्राप्त होते हैं। इस व्रत करने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है।
    • पापियों के पाप नाश के लिए इससे बढ़कर कोई उपाय नहीं है। जो मनुष्य इस एकादशी को भगवान विष्णु के वामन रूप की पूजा करता है, उससे तीनों लोक पूज्य होते हैं। 
    • इस व्रत के बारे में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं युधिष्ठिर से कहा है कि जो इस दिन कमलनयन भगवान का कमल से पूजन करते हैं, वे अवश्य भगवान के समीप जाते हैं। 
    • जिसने भाद्रपद शुक्ल एकादशी को व्रत और पूजन किया, उसने ब्रह्मा, विष्णु सहित तीनों लोकों का पूजन किया। अत: हरिवासर अर्थात एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए।

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