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श्राद्ध / 20 साल बाद 28 सितंबर को शनिवार और सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या



Pitru Paksha Shradh Start Date 2019: Pitru Paksha Shraddha Shradh Paksha Date Kab Se Hai - September 13 To 28th
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Pitru Paksha Shradh Start Date 2019: Pitru Paksha Shraddha Shradh Paksha Date Kab Se Hai - September 13 To 28th

  • पितृ पक्ष की शुरुआत में शतभिषा नक्षत्र, धृति योग और कुंभ राशि में है चंद्र का शुभ योग

Dainik Bhaskar

Sep 13, 2019, 01:34 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा यानी शुक्रवार, 13 सितंबर से पितृ पक्ष शुरू हो गया है। ग्रह-नक्षत्रों के विशेष संयोग से इस साल पितृ पक्ष बहुत शुभ रहने वाला है। उज्जैन के पं. अमर डिब्बावाला के अनुसार श्राद्ध पक्ष की शुरुआत 13 सितंबर से हो रही है। इस दिन शत तारका (शतभिषा) नक्षत्र, धृति योग और कुंभ राशि में चंद्रमा रहेगा। भाद्रपद की पूर्णिमा का एक दिन और अश्विन कृष्णपक्ष के 15 दिन को मिला कर 16 दिन के श्राद्ध होते हैं। पितृ पक्ष का समापन शनिवार, 28 सितंबर को हो रहा है। ये संयोग 20 साल बाद बना है, जब शनिवार को सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या आ रही है।
पितरों को जल से तृप्त करने वाले संयोग
शत तारका नक्षत्र पंचक का नक्षत्र है। यह शुक्ल पक्षीय है। ये नक्षत्र कई तरह के कष्टों को दूर करने वाला माना गया है। खासकर जब यह विशेष पर्व काल में शुक्ल पक्षीय हो तथा नक्षत्र के स्वामित्व पर शुभ ग्रहों का संयुक्त दृष्टिक्रम हो। पंचांग के पांच अंगों में क्रमश: पूर्णिमा तिथि के स्वामी चंद्रमा, शततारका नक्षत्र के स्वामी वरुण देव व धृति योग के स्वामी जल देवता कहे गए हैं। पितृ जल से तृप्त होकर पिंडों से संतुष्ट होकर सुख शांति व समृद्धि के साथ वंश परंपरा को आगे बढ़ाने का आशीर्वाद देते हैं। इसलिए शततारका नक्षत्र में श्राद्धपक्ष की शुरुआत शुभदायी है। 20 साल बाद सर्वपितृ अमावस्या शनिवार को आएगी। 1999 में यह संयोग बना था, जब सर्वपितृ अमावस्या शनिवार को आई थी। शनिश्चरी अमावस्या पर इंदौर रोड स्थित त्रिवेणी पर स्नान होता है।
तिथि के अनुसार करना चाहिए अपने पूर्वजो का श्राद्ध
जिस दिन जिस पूर्वज की श्राद्ध तिथि होती है, उस दिन उनका श्राद्ध करने का विधान है। इसलिए तिथि के अनुसार श्राद्ध का दिन तय किया जाता है।
13 सितंबर- पूर्णिमा का श्राद्ध, 14 सितंबर- सुबह 10.30 बजे तक पूर्णिमा, इसके बाद प्रतिपदा, 15 सितंबर- दोपहर 12.25 तक प्रतिपदा, इसके बाद द्वितीया, 16 सितंबर- दोपहर 2.35 तक द्वितीया, इसके बाद तृतीया, 17 सितंबर - तृतीया का श्राद्ध
18 सितंबर चतुर्थी का श्राद्ध 19 सितंबर- पंचमी का श्राद्ध
20 सितंबर- षष्टी का श्राद्ध 21 सितंबर- सप्तमी का श्राद्ध
22 सितंबर- अष्टमी का श्राद्ध 23 सितंबर- नवमी का श्राद्ध
24 सितंबर- दशमी का श्राद्ध 25 सितंबर- एकादशी का श्राद्ध
26 सितंबर- द्वादशी व त्रियोदशी का श्राद्ध 27 सितंबर- चतुर्दशी का श्राद्ध 28 सितंबर- सर्वपितृ अमावस्या।
पंचक का नक्षत्र, पांच गुना शुभ फल मिलेगा
शास्त्रीय मान्यतानुसार पंचक के नक्षत्रों की गणना दोनों पक्षों में तिथि व दिवस के आधार पक्ष अलग-अलग प्रकार से की जाती है। शुक्ल पक्षीय पंचक शुभ माना जाता है। विशेषकर पूर्णिमा हो तो और भी शुभ होता है। नक्षत्र मेखला की गणना से देखें तो शततारका नक्षत्र के तारों की संख्या 100 होती है। इसकी आकृति वृत्त के समान है। शुक्ल पक्षीय पूर्णिमा के चंद्रमा तथा कुंभ राशि पर गोचर अवस्था दुर्लभ मानी जाती है। यह नक्षत्र 100 प्रकार के तापों (कष्ट, बाधा, समस्या) से मुक्ति देता है। खासकर धार्मिक व आध्यात्मिक कर्म हो। यानी इस नक्षत्र में किए जाने वाले कार्य धर्म और अध्यात्म से संबंधि होना चाहिए। श्राद्धपक्ष में पितरों के निमित्त तर्प, पिंडदान, तीर्थ श्राद्ध आदि विधान होते हैं, इसलिए इस नक्षत्र का शुभ फल मिलने की संभावना है।

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