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एक राजा अपने बेटी से करता था बहुत ज्यादा प्रेम, राजकुमारी ने नहीं देखी थी बाहर की दुनिया, एक दिन बेटी ने पिता से कहा - मुझे शहर देखना है, राजा ने सोचा - इसके कोमल पैरों के लिए पूरे शहर में चमड़े की चादर बिछा देते हैं

मंत्री ने राजा को समझाया कि पूरी दुनिया को बदलने से अच्छा है खुद को बदलना

Dainik Bhaskar

Dec 07, 2018, 04:57 PM IST
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रिलिजन डेस्क। पुराने समय में एक राजा था। उसकी एक बेटी थी, जिसे वह बहुत ज्यादा प्रेम करता था। राजमहल में ही राजकुमारी के लिए सभी सुख-सुविधाएं उपलब्ध थीं। उसने बाहर की दुनिया देखी ही नहीं थी। जब वह बड़ी हो गई तो एक दिन उसने अपने पिता से कहा कि उसे शहर देखना है।

> राजा ने मना किया, लेकिन वह नहीं मानी। इसके बाद राजा ने सोचा कि इसके पैर इतने कोमल है, बाहर पथरीले रास्ते पर कैसे चल पाएगी। उस समय पक्की सड़के नहीं थीं और जूते-चप्पल भी नहीं बने थे।

> राजा ने सभी मंत्रियों को बुलाया और आदेश दिया कि शहर की सभी गलियों में चमड़े की चादर बिछा दो, ताकि राजकुमारी को चलने में कोई दिक्कत न हो।

> ये सुनकर एक मंत्री ने राजा को सुझाव दिया कि महाराज पूरे शहर में चमड़ा बिछाने से अच्छा है कि हम राजकुमारी के पैरों में ही चमड़ा पहना देते हैं। इससे राजकुमारी के पैर सुरक्षित रहेंगे और काम भी आसान हो जाएगा। बात सीधी और सरल थी। इसीलिए राजा को भी समझ आ गई।

कथा की सीख

> इस कहानी की सीख यही है कि पूरी दुनिया को अपने अनुकूल बनाने से अच्छा है कि हम खुद में बदलाव कर लें। इससे हम कई परेशानियों से बच सकते हैं। दूसरों को बदलना हमारे नियंत्रण में नहीं है, लेकिन हम खुद को आसानी से बदल सकते हैं।

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