विज्ञापन

एक राजा अपने महामंत्री का बहुत सम्मान करते और उनकी हर बात मानते थे, प्रजा में भी वे प्रसिद्ध थे, एक दिन मंत्री ने सोचा कि मेरा इतना सम्मान क्यों होता है? ये जानने के लिए राजकोष से रोज उठाने लगे स्वर्ण मुद्राएं, इसके बाद क्या हुआ? / एक राजा अपने महामंत्री का बहुत सम्मान करते और उनकी हर बात मानते थे, प्रजा में भी वे प्रसिद्ध थे, एक दिन मंत्री ने सोचा कि मेरा इतना सम्मान क्यों होता है? ये जानने के लिए राजकोष से रोज उठाने लगे स्वर्ण मुद्राएं, इसके बाद क्या हुआ?

dainikbhaskar.com

Dec 08, 2018, 04:43 PM IST

अगर आप भी चाहते हैं सभी आपका सम्मान करें तो कुछ बातों का ध्यान रखें

prerak prasang, motivational story of king and minister, raja ki kahani, inspirational story
  • comment

रिलिजन डेस्क। पुराने समय में एक राजा अपने महामंत्री के ज्ञान और योग्यता पर पूरा भरोसा था। इसलिए राजा उनकी हर बात मानते थे। प्रजा में भी महामंत्री काफी प्रसिद्ध थे। एक दिन महामंत्री के मन में सवाल उठा कि राजा और दूसरे लोग जो मेरा सम्मान करते हैं, उसका कारण क्या है? मंत्रीजी ने अपने इस प्रश्न का उत्तर पाने के लिए एक योजना बनाई।

महामंत्री उठाने लगे राजकोष से स्वर्ण मुद्राएं

# अगले दिन महामंत्री ने दरबार से लौटते समय राजा के कोषागार से एक स्वर्ण मुद्रा चुपचाप ले ली, जिसे कोषागार के अधिकारी ने देखकर भी नजरंदाज कर दिया।

# मंत्रीजी ने दूसरे दिन भी दरबार से लौटते समय दो स्वर्ण मुद्राएं उठा लीं। कोष अधिकारी ने देखकर सोचा कि शायद किसी खास वजह से वे ऐसा कर रहे हैं, बाद में अवश्य बता देंगे।

# तीसरे दिन महामंत्री ने मुट्ठी में स्वर्ण मुद्राएं भर लीं। इस बार कोष अधिकारी ने उन्हें पकड़कर सैनिकों के हवाले कर दिया। मामला राजा तक पहुंचा।

# न्यायाधीश की कुर्सी पर बैठे राजा ने अपना निर्णय सुनाते हुए कहा कि महामंत्री द्वारा तीन बार राजकोष का धन चुराया गया है। इस अपराध के लिए उन्हें तीन माह की कैद दी जाए, ताकि वह फिर कभी ऐसा अपराध न कर सकें।

# राजा के निर्णय से महामंत्री को अपने सवाल का जवाब मिल चुका था। उन्होंने राजा से निवेदन किया, ‘राजन मैं चोर नहीं हूं। मैं ये जानना चाहता था कि आपके द्वारा मुझे जो सम्मान दिया जाता है, उसका सही अधिकारी कौन है। मुझे मेरे सवाल का जवाब मिल गया है। मेरी योग्यता, ज्ञान या मेरा सदाचरण ही सम्मान के अधिकारी हैं। आज सभी लोग समझ गए हैं कि सदाचरण यानी अच्छा आचरण छोड़ते ही मैं दंड का अधिकारी बन गया हूं। सदाचरण और नैतिकता ही मेरे सम्मान का मूल कारण थी।’

कथा की सीख

इस कथा की सीख यही है कि जिन लोगों का आचरण सही है, उन लोगों को समाज में सम्मान मिलता है। आचरण बुरा हो तो व्यक्ति सजा का पात्र बन जाता है।

X
prerak prasang, motivational story of king and minister, raja ki kahani, inspirational story
COMMENT
Astrology

Recommended

Click to listen..
विज्ञापन
विज्ञापन