- शुक्रवार से शुरू हो रहा है पितृ पक्ष, इन दिनों में किया जाता है पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण
Dainik Bhaskar
Sep 12, 2019, 12:40 PM ISTजीवन मंत्र डेस्क। शुक्रवार, 13 सितंबर को भाद्रपद मास की पूर्णिमा है। इस तिथि से भादौ माह खत्म हो जाएगा। इस साल पूर्णिमा तिथि के संबंध में पंचांग भेद हैं। कुछ पंचांगों के अनुसार 14 सितंबर को पूर्णिमा है। भादौ मास की पूर्णिमा से पितृ पक्ष की शुरुआत होती है। इस बार ये पक्ष 28 सितंबर तक चलेगा। इन दिनों में पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण कर्म किए जाते हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार जानिए भादौ मास की पूर्णिमा पर कौन-कौन से शुभ काम किए जा सकते हैं...
पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण की कथा सुनने की परंपरा
- हर माह पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण की कथा सुनने की परंपरा है। इस तिथि पर विष्णुजी के साथ ही महालक्ष्मी की भी पूजा करनी चाहिए। पूजा में दक्षिणावर्ती शंख में केसर मिश्रित दूध डालकर भगवान का अभिषेक करना चाहिए।
- इस दिन शिवलिंग पर चांदी के लोटे से दूध चढ़ाना चाहिए और ऊँ सों सोमाय नम: मंत्र का जाप करना चाहिए।
- पूर्णिमा पर हनुमानजी के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें। अगर आपके पास पर्याप्त समय हो तो सुंदरकांड का पाठ करें।
- इस दिन सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास दीपक जलाएं, परिक्रमा करें। ध्यान रखें शाम को तुलसी को स्पर्श नहीं करना चाहिए, जल भी न चढ़ाएं।
- इस पूर्णिमा से श्राद्ध पक्ष की शुरुआत होती है, इसीलिए पितरों के लिए धूप-ध्यान कऱें। किसी गरीब को धन और अनाज का दान करें।
इस साल 16 दिन के श्राद्ध
इस बार 13 सितंबर से 28 सितंबर तक पितृ पक्ष रहेगा यानी पूरे 16 दिन श्राद्ध कर्म किए जाएंगे। 28 तारीख को सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या रहेगी। पितरों के लिए निमित्त तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने की परंपरा है। खासतौर पर उज्जैन, बनारस, इलाहबाद, हरिद्वार, त्र्यंबकेश्वर और गयाजी में पिंडदान करने का विशेष महत्व है।
इन बातों का रखें ध्यान
पूर्णिमा से अमावस्य तक यानी पूरे पितृ पक्ष में गलत कामों से बचें, वरना श्राद्ध कर्म का पूरा फल नहीं मिल पाएगा। घर में प्रेम बनाए रखें, क्लेश न करें। जिन घरों में अशांति होती हैं, वहां पितर देवताओं की कृपा नहीं होती है। खासतौर पर इन दिनों में साफ-सफाई रखें। नशा और मांसाहार से बचें।
