राखी / पूर्णिमा तिथि पर सत्यनारायण भगवान की कथा करने की है परंपरा



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  • रक्षाबंधन पर एक राखी अपने इष्टदेव की भी चढ़ाएं, शाम को हनुमानजी के पास जलाएं दीपक

Dainik Bhaskar

Aug 14, 2019, 04:21 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। गुरुवार, 15 अगस्त को सावन माह की अंतिम तिथि पूर्णिमा है। इस दिन बहन अपने भाई को राखी बांधती है। इसके साथ ही पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण की कथा करने की भी परंपरा है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार जानिए रक्षाबंधन पर कौन-कौन से शुभ काम किए जा सकते हैं...
सत्यनारायण भगवान की कथा से जुड़ी खास बातें
सत्यनारायण भगवान विष्णुजी का ही एक स्वरूप है। स्कंद पुराण के रेवाखंड में इनकी कथा बताई गई है। ये कथा पांच अध्यायों में है। कथा के दो विषय हैं। एक है संकल्प को भूलना और दूसरा है प्रसाद का अपमान। कथा के अलग-अलग अध्यायों में छोटे-छोटे प्रसंगों के माध्यम से बताया गया है कि सत्य का पालन न करने पर किस तरह की परेशानियां आती है और जो लोग भगवान के प्रसाद का अपमान करते हैं, उन्हें किस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
कथा में पूजा के लिए सामान
भगवान की पूजा में केले  के पत्ते और फल के साथ पंचामृत, सुपारी, पान, तिल, मोली, रोली, कुमकुम, दूर्वा रखें। दूध, शहद, केला, गंगाजल, तुलसी पत्ता, मेवा मिलाकर पंचामृत तैयार करें। प्रसाद में आटे को भून कर सत्तू बनाया जाता है या हलवे का भोग लगाया जाता है।
रक्षाबंधन और पूर्णिमा के योग में करें ये शुभ काम
रक्षाबंधन पर अपने इष्टदेव को भी एक राखी चढ़ाएं और घर में सुख-समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना करें। गुरुवार और पूर्णिमा के योग में केले के पौधे की पूजा करनी चाहिए। सूर्यास्त के बाद हनुमानजी के मंदिर में दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें। शिवलिंग पर चांदी के लोटे से दूध चढ़ाएं। बिल्व पत्र और धतूरा चढ़ाकर ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। बाल गोपाल को माखन-मिश्री का भोग लगाएं।

 

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