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रक्षाबंधन / सौभाग्य और श्रीवत्स योग में मनेगा त्योहार, राखी बांधने के शुभ मुहूर्त और भद्राकाल



Raksha Bandhan Rakhi Ka Shubh Muhurat Time; Raksha Bandhan Mantra, Raksha Bandhan Shreevatsa and Sobhagya Yog
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Raksha Bandhan Rakhi Ka Shubh Muhurat Time; Raksha Bandhan Mantra, Raksha Bandhan Shreevatsa and Sobhagya Yog

Dainik Bhaskar

Aug 15, 2019, 07:08 AM IST

जीवन मंत्र डेस्क. रक्षाबंधन पर सौभाग्य और श्रीवत्स नाम के 2 शुभ योग बन रहे हैं। इन शुभ योगों में रक्षाबंधन करने से समृद्धि और प्रेम बढ़ता है। इसके साथ ही संबंधों में मधुरता बनी रहती है। ज्योतिषाचार्य पंडित प्रफुल्ल भट्ट के अनुसार, इस साल सूर्योदय से पहले ही भद्रा खत्म हो जाएगी। भद्रा की शुरुआत बुधवार 14 अगस्त को दोपहर में होगी और 15 अगस्त को सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी। इसलिए इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा दोष नहीं रहेगा, लेकिन राहुकाल में राखी बांधने से बचना चाहिए। पूर्णिमा तिथि 15 अगस्त को शाम लगभग 6 बजे तक ही रहेगी, लेकिन रक्षाबंधन मुहूर्त रात 9:20 तक रहेगा। इस साल स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन एक ही दिन मनाया जाएगा। 19 साल पहले सन् 2000 में ऐसा हुआ था। ऐसा संयोग अगले 64 साल बाद सन 2084 में बनेगा।

 

  • राखी बांधने का मंत्र

येन बद्धो बलिराजा, दानवेन्द्रो महाबलः

तेनत्वाम प्रति बद्धनामि रक्षे, माचल-माचलः

 

  • रक्षाबंधन के मुहूर्त 

सुबह 06:15 से 07:35 तक

सुबह 11:02 से 02:05 तक

शाम 5:30 से  रात 9:20 तक

 

राहुकाल - दोपहर 02:10 से 03:45 तक

 

  • राहुकाल में न करें रक्षाबंधन

ज्योतिषाचार्य पं प्रफुल्ल भट्ट के अनुसार रक्षाबंधन का एक आवश्यक नियम है कि भद्रा काल में राखी नहीं बांधी जाती, लेकिन इस बार रक्षाबंधन पर सूर्योदय से पहले ही भद्रा समाप्त हो जाएगी। सूर्योदय से पूर्व ही भद्रा समाप्त हो जाने से बहनें दिनभर भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी, लेकिन दोपहर 02.10 से दोपहर 3 बजकर 45 तक राहुकाल होने के कारण इस अवधि में राखी नहीं बांधी जा सकेगी।

 

  • अशुभ नहीं पंचक का होना

रक्षाबंधन पर्व श्रवण नक्षत्र में मनाया जाता है। ये नक्षत्र पंचक नक्षत्रों में आता है। धनिष्ठा से रेवती तक पांच नक्षत्रों को पंचक कहा जाता है, जो कि पांच दिनों तक चलता है। पंचक को लेकर लोगों में यह भ्रांति है कि इसमें कोई शुभ काम नहीं करना चाहिए, लेकिन इसमें शुभ कार्य कर सकते हैं, क्योंकि उनकी पांच बार पुनरावृत्ति होती है। बल्कि पंचक में अशुभ काम नहीं करने चाहिए।

 

  • क्या होती है भद्रा ज्योतिष शास्त्र के अनुसार

हिन्दू पंचांग के 5 प्रमुख अंग होते हैं। ये हैं- तिथि, वार, योग, नक्षत्र और करण। इनमें करण एक महत्वपूर्ण अंग होता है। यह तिथि का आधा भाग होता है। करण की संख्या 11 होती है। बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि, शकुनि, चतुष्पद, नाग और किंस्तुघ्न होते हैं। इन 11 करणों में 7वें करण विष्टि का नाम ही भद्रा है।

यह सदैव गतिशील होती है। भद्रा या विष्टि करण में शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। ज्योतिष के अनुसार अलग-अलग राशियों के अनुसार भद्रा तीनों लोकों में घूमती है। जब यह मृत्युलोक में होती है, तब सभी शुभ कार्यों में बाधक या या उनका नाश करने वाली मानी गई है। जब चन्द्रमा कर्क, सिंह, कुंभ व मीन राशि में विचरण करता है और भद्रा विष्टि करण का योग होता है, तब भद्रा पृथ्वीलोक में रहती है। इस समय सभी कार्य शुभ कार्य वर्जित होते हैं। इसके दोष निवारण के लिए भद्रा व्रत का विधान भी धर्मग्रंथों में बताया गया है।

 

  • रक्षाबंधन पर थाली में होनी चाहिए ये 7 चीजें

सौभाग्य, प्रेम, समृद्धि और रक्षा के इस त्योहार पर पूजा की थाली में 7 महत्वपूर्ण चीजें होनी आवश्यक है। रक्षाबंधन की थाली में चंदन, अक्षत, श्रीफल, कलश, दीपक, रक्षासूत्र और मिठाई जरूर होनी चाहिए। राखी बांधने से पहले भाई को चंदन का तिलक लगाया जाता है, जिससे पापों का नाश होता है और ग्रहों की शांति भी होती है। इसके बाद अक्षत लगाने से सकारात्मकता और सौभाग्य बढ़ता है। श्रीफल से समृद्धि मिलती है। मिठाई से रिश्ते में प्रेम बना रहता है। रक्षासूत्र से अच्छा स्वास्थ्य मिलता है। दीपक से दृढ़ संकल्प और रिश्ते में पवित्रता आती है। वहीं कलश में देवताओं का वास मना जाता है। शास्त्रों के अनुसार ये सात चीजें महत्वपूर्ण हैं।

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