रक्षाबंधन / दूर्वा, केसर, चंदन की मदद से घर पर ही बना सकते हैं रक्षासूत्र



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  • 15 अगस्त और रक्षाबंधन के योग में किसी जरूरतमंद व्यक्ति को धन और कपड़ों का दान करें

Dainik Bhaskar

Aug 13, 2019, 03:50 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। गुरुवार, 15 अगस्त को रक्षाबंधन है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी यानी रक्षासूत्र बांधती हैं। आजकल बाजार में आधुनिक राखियां मिलती हैं, लेकिन पुराने समय में रक्षासूत्र बनाने के लिए कई तरह की पवित्र और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद चीजों का उपयोग किया जाता था। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार रक्षासूत्र बनाने के लिए दूर्वा, केसर, चंदन, सरसों और चावल का उपयोग होता था। इन चीजों को लाल कपड़े में बांधकर एक छोटी सी पोटली बनाई जाती थी। इस पोटली को रेशमी धागे से कलाई पर बांधा जाता था। ऐसी राखी को वैदिक रक्षासूत्र कहते हैं।
बीमारियों और बुरी नजर से बचाता है ये रक्षासूत्र
रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा पर मनाया जाता है, ये बारिश का समय है। बारिश के दिनों में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक कई तरह के सूक्ष्म कीटाणु वातावरण में पनपते हैं। वैदिक रक्षासूत्र इन कीटाणुओं से और बुरी नजर से हमारा बचाव करता है। इस संबंध में शास्त्रों में लिखा है कि-
सर्वरोगोपशमनं सर्वाशुभविनाशनम्।
सकृत्कृतेनाब्दमेकं येन रक्षा कृता भवेत्॥

इस श्लोक का अर्थ यह है कि धारण किए हुए इस रक्षासूत्र से सभी रोगों का और अशुभ समय का अंत होता है। इसे वर्ष में एक बार धारण करने से वर्षभर के लिए मनुष्य रक्षित हो जाता है।
जानिए रक्षासूत्र की पांचों चीजें कैसे काम करती हैं
पहली चीज है दूर्वा - दूर्वा पाचनतंत्र के लिए अच्छी होती है। दूर्वा गणेशजी को प्रिय है। जब बहन भाई को रक्षासूत्र बांधती है तो उसकी भावना यह होती है कि भाई को गणेशजी की कृपा प्राप्त हो और उनके सभी विघ्नों का नाश हो जाए। बहन की प्रार्थना होती है कि भाई की सभी बीमारियों से रक्षा हो।
दूसरी चीज है अक्षत - अक्षत यानी चावल को अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। अक्षत का एक अर्थ है पूर्ण होना। कलाई पर चावल बांधने का भाव यह है कि भाई-बहन का प्रेम अक्षत रहे यानी कभी भी टूटे नहीं और प्रेम सदा बना रहे।
तीसरी चीज है केसर - केसर की प्रकृति गर्म होती है। बारिश और इसके बाद आने वाले सर्दी के मौसम से रक्षा के लिए केसर की आवश्यकता होती है।
चौथी चीज है चंदन - चंदन की प्रकृति शीतल होती है और यह सुगंध देता है। इसका संकेत यह है कि हमारे मस्तिष्क की शीतलता बनी रहे, मन शांत रहे और कभी तनाव ना हो। साथ ही, परोपकार, सदाचार और संयम की सुगंध फैलती रहे।
पांचवीं चीज है सरसों के दाने - सरसों की प्रकृति तीक्ष्ण होती है। इससे यह संकेत मिलता है कि हम हमारे दुर्गुणों को, परेशानियों को समाप्त करने में हम तीक्ष्ण यानी तेजस्वी और स्वस्थ बनें।
रक्षाबंधन पर दान करें
15 अगस्त और रक्षाबंधन के योग में किसी जरूरतमंद व्यक्ति को धन और नए कपड़ों का दान करें। इस दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं। पितर के लिए तर्पण करें। पूर्णिमा पर भगवान विष्णु के स्वरूप सत्यनारायण भगवान की कथा करनी चाहिए।

 

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