रामायण / श्रीराम के वनवास जाने पर राजा दशरथ को एहसास हुआ कि अच्छे या बुरे कर्मों से ही बनता है भाग्य



Ramayan: King Dasharath Realized That Good or Bad Deeds are Made only by Destiny
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Ramayan: King Dasharath Realized That Good or Bad Deeds are Made only by Destiny

Dainik Bhaskar

Jun 18, 2019, 08:01 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क. रामायण धर्म के साथ-साथ कर्म प्रधान ग्रंथ है। रामायण से हमें कई बातें सीखने को मिलती है। वाल्मीकि ने  इस ग्रंथ में बड़े से बड़े पात्र को भी कर्म के बंधन से बंधा हुआ बताया है। जिस तरह रावण को अपने बुरे कर्म के कारण मृत्यु मिली उसी तरह श्रीराम के पिता राजा दशरथ को भी अपनी ही पुरानी गलती के कारण दुख मिला। रामायण में श्रीराम के वनवास प्रसंग में राजा दशरथ को एहसास हुआ कि अच्छे या बुरे कर्मों के फल से ही भाग्य बनता है। भाग्य कर्म से ही बनता है। हम जैसे काम करते हैं वैसा ही हमारे भाग्य का निर्माण होता है।

 

  • हम अपने कर्म पर टीके रहना चाहिए। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि हम कोई काम पूरी मेहनत से करते हैं, लेकिन फिर भी नतीजे विपरीत आते हैं। ऐसे में कुछ लोगों को कहने का मौका मिल जाता है कि हमारी किस्मत में ऐसा ही लिखा था। दरअसल जब भी किसी काम का नतीजा संतुष्टि देने वाला न हो तो अतीत में देखना चाहिए कि आपसे कहां चूक हुई थी। 

 

श्रीराम के वनवास प्रसंग से ये सीख सकते हैं 

 

  • श्रीराम को वनवास हो चुका था। राम, सीता और लक्ष्मण तीनों वन के लिए जा रहे थे। तब राजा दशरथ इस पूरी घटना को नियति का खेल बता रहे थे। वो ये सब भाग्य का लिखा मान रहे थे। 
     
  • राम के जाने के बाद जब वे अकेले कौशल्या के साथ थे तो उन्हें अपनी गलतियां नजर आने लगी। उनसे युवावस्था में श्रवण कुमार की हत्या हुई थी, दशरथ को याद आ गया। बूढ़े मां-बाप से उनका एकलौता सहारा छिन गया था। ये सब उसी का परिणाम है।
     
  • हर परिणाम के पीछे कोई कर्म जरूर होता है। बिना कर्म हमारे जीवन में कोई परिणाम आ ही नहीं सकता। अपने कर्मों पर नजर रखें। तभी आप भाग्य को समझ सकेंगे।
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