परिवार और जिम्मेदारी / परिवार की बागडोर संभालने से पहले खुद को कुछ चीजों से मुक्त कर लेना बेहतर होता है



Ramayan Ravan and family how to lead family without any problem
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Ramayan Ravan and family how to lead family without any problem

  • रावण का जीवन बताता है कि परिवार को कैसे बचाया जा सकता है

Dainik Bhaskar

Jun 14, 2019, 12:15 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क. जब कभी हम कोई कर्म करते हैं तो यह नहीं सोचते कि हमारे परिवार पर इसका क्या असर होगा। अक्सर नासमझी या अनदेखी में कई काम ऐसे हो जाते हैं जो हमने किए खुद के लिए थे, परिणाम परिवार को भुगतना पड़ता है। जीवन में परिवार की वरीयता शेष चीजों से ऊपर रहे। परिवार पूंजी है, रिश्ते हमारी सम्पत्ति। जब भी कोई काम करें तो यह अनुमान पहले ही लगा लें कि इससे आपकी इस जायदाद पर तो कोई विपरीत असर नहीं पड़ेगा।

 

अहंकार जब परिवार में प्रवेश करता है तो फिर वहां परिवार गौण और व्यक्तिवाद हावी हो जाता है। परिवार का हर सदस्य केवल स्वयं का लाभ या हानि देखने लगता है। अगर परिवार का मुखिया भी इसी भाव में जीने लगे तो फिर वो परिवार रह ही नहीं जाता। वो सिर्फ व्यक्तियों का एक समूह बनकर रह जाता है। जहां हर आदमी अपनी ही सोच में डूबा होता है।

 

परिवार को सहेजने के लिए यह ध्यान रखना जरूरी है कि हम क्या कर रहे हैं, क्यों कर रहे हैं और इसका क्या परिणाम भुगतना पड़ सकता है। आप कुछ भी करें, अगर गलत किया है तो कीमत परिवार को भी चुकानी ही पड़ेगी। हमसे परिवार जुड़ा हुआ है, चाहें हम साथ रहें या ना रहें। एक डोर हमें बांधे हुए है।

 

रावण से सीखें, अहंकार और क्रोध ने रावण का तो सर्वनाश किया ही, पूरे राक्षस कुल को प्राण देकर रावण के बुरे कर्मों की कीमत चुकानी पड़ी। शक्ति के अभिमान में रावण ने कभी यह नहीं सोचा था कि उसके परिवार का भी विनाश हो जाएगा। राक्षस कुल के अधिकतर सदस्य रावण की चाटुकारिता में थे, कुछ उससे डरते थे और जो निडर होकर सत्य बोलते थे उनकी सुनी नहीं जाती थी। पूरे परिवार की बागडोर रावण के हाथ थी लेकिन रावण खुद अपने अहंकार के हाथ की कठपुतली था। उसका अहंकार उससे जो कराता, वो वही करता था।

 

परिणाम हमारे सामने है। अगर रावण ने एक पल के लिए भी यह सोचा होता कि उसके कर्मों का परिवार पर क्या प्रभाव पड़ सकता है तो शायद वो इतनी बड़ी चूक करने से बच जाता। लेकिन सिर्फ अहंकार के कारण उसे अपने कर्मों में परिवार के अच्छे-बुरे का ध्यान नहीं रहा। हमेशा याद रखें आपके हर एक कर्म से एक महीन डोर परिवार के साथ बंधी है। हमारा कर्म जिस दिशा में होगा, परिवार भी उसी दिशा में खींचा जाएगा।

 

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