रामायण / तीन किस्से जिनसे समझ सकते हैं पति-पत्नी के बीच कैसा होना चाहिए रिश्ता



Ramayan three stories of Ramayan to understand the importance of married life
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Ramayan three stories of Ramayan to understand the importance of married life

राम-सीता और रावण मंदोदरी के रिश्तों में था एक बड़ा अंतर, सीता-राम की जोड़ी इसी कारण से है आदर्श 

Dainik Bhaskar

Aug 17, 2019, 06:15 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क. आज अधिकांश लोगों के वैवाहिक जीवन में आपसी तालमेल की कमी आ गई है। इस कारण पति और पत्नी मानसिक तनाव और परेशानियों का सामना करते हैं। ऐसी स्थिति में जीवन बोझ लगने लगता है और निराशा हावी हो जाती है। इन परिस्थितियों से बचने के लिए पति और पत्नी, दोनों को यहां बताई जा रही तीन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

- बुरे समय में न छोड़ें एक-दूसरे का साथ
- पति-पत्नी को समझनी चाहिए एक-दूसरे के मन की बात
- गलत काम करने से रोकना चाहिए

 

जब श्रीराम को मिला वनवास तो सीता ने दिया साथ

रामायण में जब कैकयी ने राजा दशरथ से दो वरदानों में भरत के लिए राज्याभिषेक और श्रीराम के लिए चौदह वर्ष का वनवास मांगा और दशरथ को यह दोनों बातें मानना पड़ी थी। तब श्रीराम वनवास जाने के लिए तैयार हो गए। उस समय लक्ष्मण के साथ ही सीता भी श्रीराम के साथ वनवास जाने के लिए तैयार हो गईं। सीता सुकोमल राजकुमारी थीं, इस कारण सभी ने उन्हें वनवास पर न जाने के लिए रोकना चाहा था। वन में नंगे पैर चलना, खुले वातावरण में रहना, सीता के संभव नहीं था। फिर भी सीता ने अपने पतिव्रत धर्म का पालन करते हुए श्रीराम के दुख में भी साथ देने के लिए वनवास पर गईं। उस काल में श्रीराम और सीता ने कई दुखों का सामना साथ-साथ किया।

आज भी पति-पत्नी के रिश्ते में यह बात होना जरूरी है। सुख के दिनों में तो सभी साथ देते हैं, लेकिन दुख के दिनों में पति-पत्नी के सच्चे प्रेम और समर्पण की परीक्षा होती है। इस परीक्षा में सफल होने के बाद वैवाहिक जीवन सुखद और आनंद से भरपूर हो जाता है।

 

जब सीता ने समझ ली थी श्रीराम के मन की बात

वनवास पर जाते समय श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के साथ ही निषादराज को केवट ने अपनी नाव से गंगा नदी पार करवाई थी। जब केवट ने उन्हें गंगा नदी के दूसरे किनारे पर पहुंचा दिया तब श्रीराम उसे भेंट स्वरूप कुछ देना चाहते थे। श्रीराम के पास केवट को देने के लिए कुछ नहीं था। श्रीराम के कहे बिना ही सीता ने उनकी मन:स्थिति को समझकर अपनी अंगूठी उतारकर केवट को भेंट करने के लिए आगे बढ़ा दी। 

इस प्रसंग से समझा जा सकता है कि पति-पत्नी के बीच ऐसा तालमेल होना चाहिए कि बिना कुछ कहे ही वे एक-दूसरे की इच्छा समझ सके। जो दंपत्ति ये बात ध्यान रखते हैं, उनके जीवन में चाहे कितनी भी परेशानियां क्यों न आए, उनका वैवाहिक जीवन सुखद ही रहता है।


मंदोदरी ने रावण को समझाया था श्रीराम से बैर न करें

जब श्रीराम अपनी वानर सेना के साथ समुद्र पार कर लंका पहुंच गए थे तब मंदोदरी समझ गई थी कि लंकापति रावण की पराजय तय है। इस कारण मंदोदरी ने रावण को समझाने का बहुत प्रयास किया कि वे श्रीराम से युद्ध ना करें। सीता को लौटा दें। श्रीराम स्वयं भगवान का अवतार हैं। मंदोदरी में कई बार रावण को समझाने का प्रयास किया कि श्रीराम से युद्ध करने पर कल्याण नहीं होगा, लेकिन रावण नहीं माना। श्रीराम के साथ युद्ध किया और अपने सभी पुत्रों और भाई कुम्भकर्ण के साथ ही स्वयं भी मृत्यु को प्राप्त हुआ।

पति-पत्नी के जीवन में यह बात भी महत्वपूर्ण है कि एक-दूसरे को गलत काम करने से रोकना चाहिए। गलत काम का बुरा नतीजा ही आता है। सही-गलत को समझते हुए एक-दूसरे को सही सलाह देनी चाहिए। साथ ही, दोनों को ही एक-दूसरे की सही सलाह माननी भी चाहिए। पति-पत्नी ही एक-दूसरे के श्रेष्ठ सलाहकार होते हैं।

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