रामायण / हनुमान जी से सीखें, दिल में उतरती है संतुलित शब्दों में कही बात



Ramayana: Learning From Hanuman ji, How To Use Balanced Words
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Ramayana: Learning From Hanuman ji, How To Use Balanced Words

Dainik Bhaskar

Jun 29, 2019, 08:58 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क. रामायण के हर पात्र से हम कुछ न कुछ खास सीख सकते हैं। उनसे मिली सीख आज के युग में भी हमारे काम आ सकती है। रामायण काल में हनुमान जी ने जो भी काम किए हर काम के पीछे एक शिक्षा छुपी हुई है। पं विजयशंकर मेहता के अनुसार हनुमान जी से हमें सीखाना चाहिए कि कोई महत्वपूर्ण कार्य या अभियान पूरा करना हो तो उसके पक्ष में वातावरण बनाएं। यदि बोलने का अवसर मिल जाए तो इतने संतुलित व प्रभावपूर्ण शब्दों में बात रखें कि जब कार्य पूर्ण हो तो लोग उन शब्दों को याद रखें। बोला हुआ और किया हुआ यदि सही ढंग से प्रस्तुत हो जाए तो शत्रु भी आपका यशगान करेंगे। 

  • रामायण में हनुमानजी के साथ ऐसा ही हुआ था। लंका जलाने से पहले भरी सभा में रावण को बहुत अच्छे से समझाया था। हनुमानजी बहुत अच्छे वक्ता थे। रावण भी कम विद्वान नहीं था, लेकिन हनुमानजी ने अपनी वाक् कला से पूरी सभा को प्रभावित किया था। अपनी बात संक्षेप में पूरी शिष्टता के साथ संदेश के भाव से कह देने में हनुमानजी बेजोड़ थे और उन्होने अपनी बात कह दी। हनुमान जी ने जो कहा और किया उसका असर संपूर्ण राक्षस कुल पर पड़ा।

लंका कांड में जब लक्ष्मणजी मूर्छित हुए और हनुमानजी औषधि लेने चले तो किसी ने रावण को सूचना दी। रावण कालनेमि नामक राक्षस के पास गया कि किसी प्रकार हनुमान का मार्ग रोके। रावण और कालनेमि में जो बात हुई उस पर तुलसीदासजी ने लिखा है, 

 

‘दसमुख कहा मरमु तेहिं सुना। पुनि पुनि कालनेमि सिरू धुना।। 

देखत तुम्हहि नगरू जेहिं जारा। तासु पंथ को रोकन पारा।। 

 

  • रावण ने सारा हाल बताया, कालनेमि ने सुना और बार-बार सिर पीटते हुए बोला- तुम्हारे देखते-देखते जिसने पूरा नगर जला डाला, उसका मार्ग कौन रोक सकता है? यह हनुमानजी की ख्याति थी, जो एक राक्षस बयां कर रहा था। हनुमानजी से सीखें, ऐसे काम करें कि उस सद्कार्य के पक्ष में हमारे शब्द भी लोगों को सदैव याद रह जाएं। 
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