रामायण / रावण की तीन बुराइयों की वजह से हुआ उसके वंश का नाश



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  • घर-परिवार की खुशहाली के लिए अहंकार से बचें और सिर्फ का लाभ न देखें

Dainik Bhaskar

Jun 06, 2019, 03:35 PM IST

रिलिजन डेस्क। श्रीरामचरित मानस में रावण को बुराइयों का प्रतीक माना गया है। रावण के अधार्मिक कामों की वजह से उसका और उसके वंश का नाश हो गया है। अहंकार और क्रोध ने रावण का तो सर्वनाश किया ही, पूरे राक्षस कुल को प्राण देकर रावण के बुरे कर्मों की कीमत चुकानी पड़ी। शक्ति के अभिमान में रावण ने कभी ये नहीं सोचा था कि उसके परिवार का भी विनाश हो जाएगा। 
रामायण के अनुसार राक्षस कुल के अधिकतर सदस्य रावण की चाटुकारिता में लगे रहते थे, उससे डरते थे और जो निडर होकर सत्य बोलते थे, उनकी बात रावण सुनता नहीं था। पूरे परिवार की बागडोर रावण के हाथ में थी, लेकिन रावण खुद अपने अहंकार के हाथ की कठपुतली था। उसका अहंकार उससे जो कराता, वो वही करता था। परिणाम हमारे सामने है। अगर रावण ने एक पल के लिए भी यह सोचा होता कि उसके कर्मों का परिवार पर क्या प्रभाव पड़ सकता है तो शायद वो इतनी बड़ी गलती करने से बच सकता था। 
अहंकार, क्रोध और निजी स्वार्थ के कारण उसे अपने कर्मों में परिवार के अच्छे-बुरे का ध्यान नहीं रहा। हमेशा याद रखना चाहिए कि आपके हर एक कर्म से एक बारीक सी डोर परिवार के साथ बंधी है। हमारा कर्म जिस दिशा में होगा, परिवार भी उसी दिशा में खिंचा जाएगा।

परिवार की खुशहाली के लिए ध्यान रखें ये बातें

  1. व्यक्ति की अच्छी-बुरी आदतों का असर घर-परिवार में सभी सदस्यों के जीवन पर होता है। इसीलिए बुरी आदतों को जल्दी से जल्दी छोड़ देना चाहिए। अहंकार जब परिवार में प्रवेश करता है तो फिर वहां व्यक्तिवाद हावी हो जाता है। परिवार में केवल स्वयं का लाभ नहीं देखना चाहिए। सभी के विषय में सोचना चाहिए। परिवार के सुख के लिए यह ध्यान रखें कि हम क्या कर रहे हैं, क्यों कर रहे हैं और इसका क्या परिणाम भुगतना पड़ सकता है। आप कुछ भी करें, अगर गलत किया है तो कीमत परिवार को भी चुकानी ही पड़ेगी। इन बातों का ध्यान रखने पर हम बुरे परिणाम से बच सकते हैं।

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