रामायण / वैवाहिक जीवन में अहंकार होगा तो पति-पत्नी के बीच बनेंगी विवाद की स्थितियां



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  • सीता के स्वयंवर में श्रीराम ने तोड़ा शिवजी का धनुष, इस प्रसंग में छिपे हैं सुखी जीवन के सूत्र

Dainik Bhaskar

Jun 10, 2019, 01:02 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। अधिकतर घरों में पति-पत्नी के बीच छोटी-छोटी बातों पर झगड़े होना आम बात है। जब पति-पत्नी के बीच तालमेल में कमी आती है तो झगड़े की स्थिति बनती है। जब वैवाहिक जीवन में अहंकार प्रवेश करता है तो बात और ज्यादा बिगड़ जाती है। इससे बचना चाहिए रामायण में श्रीराम और सीता के जीवन से हम सीख सकते हैं कि सही तालमेल बनाए रखने के लिए क्या करना चाहिए, सीता स्वयंवर के प्रसंग में छिपे हैं सुखी वैवाहिक जीवन के सूत्र...

ये है प्रसंग

रामायण में जब सीता का स्वयंवर चल रहा था। शिवजी का धनुष तोड़ने वाले से सीता का विवाह किया जाना था। ये शर्त सीता के पिता राजा जनक ने रखी थी। कई राजाओं और वीरों ने प्रयास किया, लेकिन किसी से भी धनुष हिला तक नहीं। तब ऋषि विश्वामित्र ने राम को आज्ञा दी और कहा जाओ राम धनुष उठाओ। श्रीराम ने सबसे पहले अपने गुरु को नमन किया। फिर शिवजी का ध्यान करके धनुष को प्रणाम किया। धनुष को उठाया और उसे किसी खिलौने की तरह तोड़ दिया।
इस प्रसंग में छिपा है ये संकेत
इस प्रसंग को जीवन प्रबंधन की दृष्टि से देखने की जरूरत है। आखिर धनुष ही क्यों उठाया और तोड़ा गया? धनुष ही विवाह के पहले की शर्त क्यों थी? वास्तव में इसके पीछे एक खास संकेत छिपा है। इस प्रसंग को आसानी से समझा जा सकता है। अगर दार्शनिक रूप से समझें तो धनुष अहंकार का प्रतीक है। अहंकार जब तक हमारे भीतर होगा, हम किसी के साथ अपना जीवन नहीं बीता सकते। अहंकार को तोड़कर ही वैवाहिक जीवन में में प्रवेश करना चाहिए। इसके लिए विवाह करने वाले में इतनी परिपक्वता और समझ होना जरूरी है। अगर आज भी शादी से पहले ही वर-वधु अपने अहंकार पर काबू पा लेते हैं तो उनका वैवाहिक जीवन हमेशा सुखी बना रहेगा, दोनों के बीच कभी भी झगड़े की स्थिति नहीं बनेगी और प्रेम बना रहेगा।

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