फैमिली मैनेजमेंट / पति-पत्नी के बीच अहंकार नहीं होना चाहिए, वरना रिश्ते में तालमेल बिगड़ जाता है



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  • सीता स्वयंवर के प्रसंग से समझ सकते हैं पति-पत्नी को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

Dainik Bhaskar

Aug 17, 2019, 05:43 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। पति-पत्नी के बीच छोटी-छोटी बातों पर झगड़े होना आम बात है। जब पति-पत्नी के बीच तालमेल में कमी आती है तो वाद-विवाद होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। रामायण में श्रीराम और सीता के जीवन से हम समझ सकते हैं कि वाद-विवाद की स्थिति से बचने के लिए क्या करना चाहिए।

सीता के स्वयंवर में छिपा है सुखी वैवाहिक जीवन का संदेश

रामायण में जब भगवान श्रीराम के विवाह प्रसंग में सीता का स्वयंवर चल रहा था। सीता के पिता जनक की शर्त थी कि शिवजी का धनुष तोड़ने वाले से सीता का विवाह किया जाएगा। कई राजाओं और वीरों ने प्रयास किया, लेकिन किसी से भी धनुष हिला तक नहीं। तब ऋषि विश्वामित्र ने राम को आज्ञा दी और कहा जाओ राम धनुष उठाओ। राम ने सबसे पहले अपने गुरु को नमन किया। फिर शिव का ध्यान करके धनुष को प्रणाम किया। देखते ही देखते, धनुष को उठाया और उसे किसी खिलौने की तरह तोड़ दिया।
धनुष है अहंकार का प्रतीक
आखिर धनुष ही क्यों उठाया और तोड़ा गया। धनुष ही विवाह के पहले की शर्त क्यों थी। वास्तव में इसके पीछे एक खास संकेत छिपा है। इस प्रसंग को आसानी से समझा जा सकता है। अगर दार्शनिक रूप से समझें तो धनुष अहंकार का प्रतीक है। अहंकार जब तक हमारे भीतर होगा, हम किसी के साथ अपना जीवन नहीं बीता सकते। अहंकार को तोड़कर ही वैवाहिक जीवन में में प्रवेश करना चाहिए। इसके लिए विवाह करने वाले में इतनी परिपक्वता और समझ होना जरूरी है।
अगर आज भी शादी से पहले ही वर-वधु अपने अहंकार पर काबू पा लेते हैं तो उनका वैवाहिक जीवन हमेशा सुखी बना रहेगा, दोनों के बीच कभी भी झगड़े की स्थिति नहीं बनेगी और प्रेम बना रहेगा।

 

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