रामायण / स्वयंवर से पहले श्रीराम ने सीता को पहली बार फूलों के बाग में देखा था



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  • विश्वामित्र के साथ श्रीराम और लक्ष्मण पहुंचे थे जनकपुरी, सीता ने माता पार्वती से श्रीराम को पति रूप में पाने की कामना की थी

Dainik Bhaskar

Sep 20, 2019, 03:46 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। श्रीरामचरित मानस में श्रीराम और सीता से जुड़ी कई रोचक प्रसंग बताए गए हैं। स्वयंवर से भी पहले श्रीराम और सीता ने एक-दूसरे को देखा था। श्रीरामचरित मानस के बालकाण्ड में ये प्रसंग दिया गया है। जानिए ये प्रसंग...
कहां देखा था श्रीराम ने पहली बार सीता को
रामायम में जब राक्षसी ताड़का का आतंक काफी बढ़ गया तो ऋषि विश्वामित्र श्रीराम के पास पहुंचे। विश्वामित्र ने राजा दशरथ से श्रीराम और लक्ष्मण को उनके भेजने का निवेदन किया। राजा दशरथ ऋषि की बात टाल नहीं सकते थे, इसलिए उन्होंने राम-लक्ष्मण को ऋषि के साथ जाने की आज्ञा दे दी। जब श्रीराम और लक्ष्मण विश्वामित्र के साथ वन में पहुंचे तो वहां राक्षसी ताड़का आ गई। ऋषि विश्वामित्र ने श्रीराम को उसका वध करने की आज्ञा दी। श्रीराम ने गुरु की आज्ञा मिलने के बाद ताड़का का वध कर दिया। इसके बाद श्रीराम और लक्ष्मण ऋषि विश्वामित्र के साथ जनकपुरी पहुंचे।
राजा जनक सभी को आदरपूर्वक अपने साथ महल लेकर आए। अगले दिन सुबह दोनों भाई फूल लेने बाग में गए। उसी समय राजा जनक की पुत्री सीता भी माता पार्वती की पूजा करने के लिए वहां आईं। सीता श्रीराम को देखकर मोहित हो गईं और एकटक निहारती रहीं। श्रीराम भी सीता को देखकर बहुत आनंदित हुए।
इस संबंध में श्रीरामचरित मानस में लिखा है कि
देखि सीय सोभा सुखु पावा। ह्रदयं सराहत बचनु न आवा।।
जनु बिरंचि जब निज निपुनाई। बिरचि बिस्व कहं प्रगटि देखाई।।

इन चौपाइयों का अर्थ यह है कि सीताजी को शोभा देखकर श्रीराम ने बड़ा सुख पाया। हृदय में वे उनकी सराहना करते हैं, लेकिन मुख से वचन नहीं निकलते। मानों ब्रह्मा ने अपनी सारी निपुणता को मूर्तिमान बनाकर संसार को प्रकट करके दिखा दिया हो।
इसके बाद माता पार्वती का पूजन करते समय सीता ने श्रीराम को पति रूप में पाने की कामना की। अगले दिन स्वयंवर का आयोजन हुआ। आयोजन में शर्त रखी गई कि जो योद्धा भगवान शंकर के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी के साथ सीता का विवाह किया जाएगा। राजा जनक के बुलावे पर ऋषि विश्वामित्र व श्रीराम व लक्ष्मण भी उस स्वयंवर में गए। स्वयंवर में जब सभी राजा उस धनुष को उठाने में असफल हो गए, तब श्रीराम को ऋषि विश्वामित्र ने आज्ञा दी कि वे इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएं। श्रीराम ने धनुष उठाया और उस प्रत्यंचा चढ़ाने लगे, तभी वह धनुष टूट गया। इस प्रसंग के बाद सीता और श्रीराम को विवाह हुआ।

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