रविवार और एकादशी का शुभ योग, इस एकादशी पर आंवले के वृक्ष की पूजा करने की है परंपरा

17 मार्च को भगावन विष्णु-लक्ष्मी की पूजा में बोलें एक मंत्र, शाम को तुलसी के पास दीपक जलाएं

Mar 14, 2019, 09:18 PM IST

रिलिजन डेस्क। रविवार, 17 मार्च को फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। इसे रंगभरी और आमलकी एकादशी कहा जाता है। इस तिथि पर आंवले के वृक्ष की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन माता अन्नपूर्णा के दर्शन करने महत्व है। मान्यता है कि आंवले के वृक्ष की उत्पत्ति भगवान विष्णु से संबंधित है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार आमलकी एकादशी रविवार को होने से इस दिन सूर्य देव की भी पूजा खासतौर पर करनी चाहिए। यहां जानिए इस एकादशी पर कौन-कौन से शुभ काम करना चाहिए...

> एकादशी पर सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद भगवान सूर्य को जल चढ़ाएं। जल चढ़ाते समय ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें। मंत्र जाप कम से कम 108 बार करें।

> इसके बाद घर के मंदिर में या किसी अन्य मंदिर में भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की पूजा करें। पूजा में दक्षिणावर्ती शंख से भगवान का अभिषेक करें।

> अगर आप चाहें तो इस तिथि पर विष्णु भगवान के लिए व्रत भी कर सकते हैं। व्रत करने वाले भक्त को एक समय फलाहार करना चाहिए। इस दिन किसी ब्राह्मण को भोजन करवाएं और दान करें।

> भगवान विष्णु को केले का भोग लगाएं।किसी गरीब को भोजन कराएं और धन का दान करें। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप 108 बार करें।

> सूर्यास्त के तुलसी के पास दीपक जलाएं और परिक्रमा करें। ध्यान रखें शाम के समय तुलसी को छूना नहीं चाहिए।

> एकादशी पर चांदी के बर्तन से शिवलिंग पर दूध चढ़ाएं। 11, 21 या 51 अपनी श्रद्धा के अनुसार बिल्वपत्र पर शिवलिंग पर चढ़ाएं। इसके बाद ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करें।

> शिवलिंग पर तांबे के लोटे से केसर मिश्रित जल चढ़ाएं। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करें।

> सूर्यास्त के बाद शिवजी के सामने घी का दीपक जलाएं और शिव मंत्र ऊँ सांब सदा शिवाय नम: का जाप 108 बार करें।

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