दशहरा विशेष / मेघनाथ को लंबी उम्र ना देने पर रावण ने काट दिया था शनिदेव का पैर



ravan cut shanidev leg for gave indrajeet short life
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ravan cut shanidev leg for gave indrajeet short life

Oct 16, 2018, 06:23 PM IST

रिलिजन डेस्क. शनि के ढ़ाई व साढे साती सुनकर ज्यादातर लोगों के मन में सवाल आता होगा कि ये 2 और 7 भी तो हो सकता है । इसका कारण हैं शनिदेव की धीमी चाल है जो रावण के पैर काटने से हो गई थी। इसका जिक्र हमारे शास्त्रों में भी मिलता है। तो हम आपको इसके बारे में पूरी जानकारी देते हैं।

जाने रावण ने क्यों काटा था शनिदेव का पैर?

  1. मेघनाथ की दीर्घायु चाहता था रावण

    रावण ज्योतिष शास्त्र का ज्ञाता था। रावण चाहता था कि उसका पुत्र दीर्घायु और सर्व शक्तिमान हो। इसीलिए जब रावण की पत्नी मंदोदरी गर्भ से थी तब रावण ने इच्छा जताई की उसका होने वाला पुत्र ऐसे नक्षत्रों में पैदा हो जिससे कि वह महा-पराक्रमी और दीर्घायु वाला हो।

     

    • इसके लिए रावण ने सभी ग्रहों को मेघनाथ के जन्म के समय शुभ और सर्वश्रेष्ठ स्थिति में रहने का आदेश दिया । रावण के डर से सारे ग्रह रावण की इच्छानुसार शुभ व उच्च स्थिति में विराजमान हो गए, लेकिन शनिदेव को रावण की ये बात पसंद नहीं आई। 
    • शनि देव आयु की रक्षा करते हैं लेकिन रावण जानता था कि शनि देव उसकी बात मानकर शुभ स्थिति में विराजित नहीं होंगे। इसलिए रावण ने अपने बल का प्रयोग करते हुए शनि देव को भी ऐसी स्थिति में रखा, जिससे उसके होने वाले पुत्र की उम्र लंबी हो सके।

  2. नहीं माने शनिदेव

    शनि न्याय के देवता हैं इसलिए शनिदेव ने रावण की मनचाही स्थिति में तो चले गए लेकिन जैसे ही मेघनाद के जन्म का समय आया तो उन्होने इस दौरान अपनी दृष्टि वक्री कर ली। जिसकी वजह से मेघनाद अल्पायु हो गया।

     

    • इसका पता जैसे ही रावण को चला तो वो क्रोधित हो गया और रावण ने क्रोध के आकर अपनी तलवार से शनि के पैर पर प्रहार किया। और उनका एक पैर काट दिया। तभी से शनि देव लंगड़ाकर चलते हैं। और इसिलिए वे धीमी चाल चलते है।

  3. शनि की बुरी नजर से बचाते है हनुमान

    हनुमान जी ने शनि महाराज को रावण की कैद से आजाद कराया था इसलिए शनि देवता ने यह वचन दिया था कि जो भी हनुमान जी की पूजा करेगा मैं उसे कभी कष्ट नहीं दूंगा। इसीलिए शनि या साढ़े साती के निवारण के लिए हनुमानजी की पूजा करनी चाहिए।

     

    • शनि की वक्रद्रष्टि से बचने के लिए रोजाना हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। इससे हनुमान जी आप की रक्षा करते हैं।

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