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नॉलेजः सिर्फ मान्यता नहीं है पति-पत्नी का एक साथ पूजा करना, इसके पीछे धार्मिक कारण के साथ-साथ छिपा है सफल वैवाहिक जीवन का रहस्य भी

शादीशुदा लोग पूजा में हमेशा साथ ही क्यों बैठते हैं? क्यों नहीं कर सकते है अकेले पूजा ?

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2018, 04:26 PM IST

रिलिजन डेस्क. हिंदू धर्म में हर शुभ काम से पहले पूजा करने का विधान है। इस पूजा में पति के साथ पत्नी का होना बहुत जरूरी है। बिना पत्नी के पति अकेले पूजा नहीं कर सकता। इसके पीछे धार्मिक व मनोवैज्ञानिक कारण छिपा है।

हमारे धर्म ग्रंथों में पत्नी को पति की अर्धांगिनी कहा जाता है, जिसका अर्थ है पति का आधा हिस्सा। यानी पति यदि पूजा करेगा तो उसे उसका संपूर्ण फल तब तक नहीं मिलेगा, जब तक पत्नी उसके साथ न हो। क्योंकि पत्नी के बिना पति द्वारा की गई पूजा अधूरी मानी गई है। विवाह के समय पति अपनी पत्नी को ये वचन भी देता है कि पूजा आदि हर शुभ काम में वह हमेशा उसे अपने साथ रखेगा।

इसके तथ्य के पीछे मनोवैज्ञानिक पक्ष भी छिपा है, वह है पति-पत्नी को मिला समान अधिकार। पत्नी के बिना पूजा नहीं हो सकती, इसका सीधा सा अर्थ है कि पति-पत्नी को मिल-जुलकर ही गृहस्थी चलानी है। एक-दूसरे के अभाव में ये संभव नहीं है। इसलिए हमेशा पति-पत्नी के बीच सामंजस्य रहना जरूरी है।

reason behind worship together husband and wife in mythology
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