गंगा दशहरा आज / गंगा में नहाने से खत्म होते हैं 10 तरह के पाप, इस स्नान से जुड़े कुछ नियम भी हैं



Rules of Ganga Snan There Are 10 Types of Sin Erases From Bath in The Ganga
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Rules of Ganga Snan There Are 10 Types of Sin Erases From Bath in The Ganga

Dainik Bhaskar

Jun 11, 2019, 07:48 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क. गंगा के स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण का पौराणिक महत्व है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को हस्त नक्षत्र में गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। अत: इस दिन को उनके नाम से गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है। इस बार गंगा दशहरा 12 जून को मनाया जा रहा है। इस दिन गंगा स्नान करने से 10 तरह के पाप खत्म हो जाते हैं। गंगा स्नान के अलावा दान और पूजा करने से मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं। वहीं ग्रंथों में गंगा स्नान के कुछ नियम भी बताए गए हैं। जिनको ध्यान में रखकर स्नान करने से पुण्य मिलता है।

 

गंगा स्नान से ये 10 पाप हो जाते हैं खत्म

  • गंगा दशहरा को गंगा नदी में स्नान करने मात्र से पापों का नाश होता है तथा अनंत पुण्यफल की प्राप्ति होती है। इस दिन गंगा नदी में स्नान करना चाहिए, ऐसा न कर सकते तो घर में ही पानी में गंगाजल डालकर नहाना चाहिए। गंगा स्नान करने से 10 तरह के पाप खत्म हो जाते हैं।

 

  • स्मृतिग्रंथ में दस प्रकार के पाप बताए गए हैं। कायिक, वाचिक और मानसिक। इनके अनुसारकिसी दूसरे की वस्तु लेना, शास्त्र वर्जित हिंसा, परस्त्री गमन ये तीन प्रकार के कायिक यानी शारीरिक पाप हैं। कटु बोलना, असत्य भाषण, परोक्ष में यानी पीठ पीछे किसी की निंदा करना, निष्प्रयोजन बातें करना ये चार प्रकार के वाचिक पाप हैं। इनके अलावा परद्रव्य को अन्याय से लेने का विचार करना, मन में किसी का अनिष्ट करने की इच्छा करना, असत्य हठ करना ये तीन प्रकार के मानसिक पाप हैं। 

 

 

  • गंगा स्नान के नियम

 

1. गंगा स्नान से पहले सामान्य जल से अच्छे से नहा लें। गंगा नदी में सिर्फ डूबकी लगाएं। पवित्र नदी में शरीर का मेल न निकालें।

 

2. गंगा नदी में मनुष्य की अशुद्धि नहीं जानी चाहिए। स्नान करते समय शरीर को हाथों से नहीं रगड़ना चाहिए।

 

3. गंगा स्नान करने के बाद शरीर को कपड़े से नहीं पोंछना चाहिए। जल को शरीर पर की सुखने देना चाहिए।

 

4. मृत्यु या जन्म सूतक के समय भी गंगा स्नान किया जा सकता है, लेकिन महिलाओं को अपवित्र स्थिति में गंगा स्नान नहीं करना चाहिए।

 

5. घर पर नहाने की स्थिति में गंगाजल की कुछ बूंदे या कम मात्रा ही नहाने के पानी में मिलाकर नहाएं।

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