सावन / 17 जुलाई से 15 अगस्त तक शिवजी का माह सावन, पूजा की सरल विधि और आरती

Shravan Sawan Date 2019 Start and End Date, Shiva Mantra Aarti, Shiv Puja Vrat Vidhi - Significance Of Sawan 2019
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Shravan Sawan Date 2019 Start and End Date, Shiva Mantra Aarti, Shiv Puja Vrat Vidhi - Significance Of Sawan 2019

  • पूजा में शिवलिंग पर चंदन, धतूरा, जनेऊ सहित 15 चीजें जरूर चढ़ाएं, शिव-पार्वती के मंत्रो का जाप करें

Jul 16, 2019, 03:23 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। बुधवार, 17 जुलाई से शिवजी का प्रिय माह सावन शुरू हो रहा है। इस साल ये माह गुरुवार, 15 अगस्त तक रहेगा। 15 तारीख को सावन की पूर्णिमा रहेगी, इस दिन रक्षा बंधन पर्व मनाया जाएगा। सावन में शिवजी की विशेष पूजा की जाती है। पूरे माह शिव भक्त मंत्र जाप करते हैं, भगवान के दर्शन के लिए शिव मंदिर जाते हैं। उज्जैन के इंद्रेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी और ज्योतिर्विद पं. सुनील नागर के अनुसार जानिए शिव पूजा की सरल विधि, मंत्र और शिवजी की आरती...

  • शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए 15 चीजें

पूजा में शिवलिंग पर चंदन, धतूरा, चावल, आंकड़े के फूल, बिल्वपत्र, जनेऊ, प्रसाद के लिए फल, दूध, मिठाई, नारियल, पंचामृत, सूखे मेवे, मिश्री, पान, दक्षिणा पूजा में शिवलिंग पर जरूर चढ़ाएं।

  • पूजा में बोलना चाहिए शिव-पार्वती के मंत्र

ऊँ उमामहेश्वराभ्यां नम:, इस एक मंत्र से शिवजी और मां पार्वती दोनों प्रसन्न होते हैं। अगर आप चाहें तो शिव-पार्वती के अलग-अलग मंत्रों का जाप का भी कर सकते हैं। शिव मंत्र : ऊँ सांब सदा शिवाय नम: और पार्वती मंत्र : ऊँ गौर्ये नम:। मंत्र जाप कम से कम 108 बार करना है।

  • शिव पूजा की सरल विधि

> घर के मंदिर में शिव-पार्वती के सामने पूजा करने का संकल्प करें। यानी आप शिव-पार्वती की पूजा करेंगे, इस बात का संकल्प करना है।
> घर के मंदिर में या किसी अन्य मंदिर में शिव-पार्वती की पूजा का प्रबंध करें। अगर आप विवाहित हैं तो जीवन साथी के साथ आसन पर बैठें और अविवाहित हैं तो अपने माता-पिता के साथ पूजा कर सकते हैं। पूजा में सबसे पहले गणेशजी का पूजन करें। पत्नी को पति के बाएं हाथ की ओर बैठना चाहिए।
> गणेशजी को स्नान कराएं। वस्त्र अर्पित करें। गंध, हार-फूल, चावल, प्रसाद, जनेऊ आदि चीजें चढ़ाएं।
> गणेश पूजा के बाद शिव-पार्वती की पूजा करें। शिव-पार्वती की प्रतिमा या शिवलिंग को स्नान कराएं।
> जल से शिवलिंग को स्नान कराएं, इसके बाद पंचामृत से और फिर जल से स्नान कराएं। पंचामृत दूध, दही, घी, मिश्री और शहद मिलाकर बनाएं।
> शिव-पार्वती को वस्त्र अर्पित करें। वस्त्रों के बाद फूल चढ़ाएं। शिवलिंग को चंदन से तिलक करें। माता पार्वती को यानी शिवलिंग की जलाधारी को या माता पार्वती की प्रतिमा पर कुमकुम से तिलक करें। पूजा में शिव-पार्वती के मंत्रों का जाप करते रहें।
> चंदन, धतूरा, चावल, आंकड़े के फूल, बिल्वपत्र, जनेऊ, प्रसाद के लिए फल, दूध, मिठाई, नारियल, पंचामृत, सूखे मेवे, मिश्री, पान, दक्षिणा पूजा में शिवलिंग पर चढ़ाएं।
> अब धूप-दीप जलाएं। घी या तेल का दीपक जला सकते हैं। भगवान की आरती करें। आरती में कर्पूर भी जलाएं। शिवलिंग की आधी परिक्रमा करें।
> पूजा में हुई भूल के लिए क्षमा याचना करें। पूजा के बाद प्रसाद अन्य भक्तों में वितरित करें और स्वयं भी ग्रहण करें। ध्यान रखें इस दिन भगवान विष्णु और लक्ष्मीजी की पूजा जरूर करें।

  • शिवजी की आरती

ऊँ जय शिव ओंकारा, भोले हर शिव ओंकारा।

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥

ऊँ हर हर हर महादेव...॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे।

हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥

ऊँ हर हर हर महादेव..॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।

तीनों रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे॥

ऊँ हर हर हर महादेव..॥
अक्षमाला बनमाला मुण्डमाला धारी।

चंदन मृग मद सोहै भोले भंडारी॥

ऊँ हर हर हर महादेव..॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।

सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥

ऊँ हर हर हर महादेव..॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता।
जगकर्ता जगभर्ता जगपालन करता॥

ऊँ हर हर हर महादेव..॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥

ऊँ हर हर हर महादेव..॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी॥

ऊँ हर हर हर महादेव..॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥

ऊँ हर हर हर महादेव..॥
ऊँ जय शिव ओंकारा भोले हर शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा ।।

ऊँ हर हर हर महादेव....।।

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