शनिवार और शनि मंदिर / यहां शनि को तेल चढ़ाने के बाद गले भी लगाते हैं लोग, रामायण काल से जुड़ा है मंदिर



Shani dev Shani temple importance of shanidev gwalior shanishchara temple
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Shani dev Shani temple importance of shanidev gwalior shanishchara temple

  • मान्यता है कि लंका से हनुमान के फेंकने पर यहां गिरे थे शनिदेव, आज भी हैं गिरने का निशान

Jun 21, 2019, 05:12 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क.  मध्य प्रदेश में ग्वालियर से 18 किमी दूर मुरैना जिले में बना शनि मंदिर कई मामलों में काफी अलग है। मंदिर का नाम है शनिश्चरा मंदिर। इसका इतिहास रामायण काल से जुड़ा है। यह देश के सबसे प्राचीनतम शनि मंदिरों में से एक माना जाता है। शनिदेव के यहां विराजित होने के कारण इस जगह को बहुत ही प्रभावशाली माना जाता है। इस मंदिर की खासियत ये है कि यहां लोग शनि को तेल चढ़ाने के बाद उन्हें गले लगाते हैं।

 

स्थानीय कथाओं के अनुसार, रावण ने शनिदेव को भी कैद कर रखा था। जब हनुमान जी माता सीता की खोज में लंका पहुंचे, तब उन्होंने वहां पर शनिदेव को रावण की कैद में देखा। भगवान हनुमान को देख शनिदेव ने उनसे यहां से आजाद करने की विनती की। शनिदेव के कहने पर भगवान हनुमान नो उन्हें लंका से कहीं दूर फेंक दिया, ताकि शनिदेव किसी सुरक्षित जगह पर जा सकें। हनुमान जी द्वारा लंका से फेंके जाने पर शनिदेव इस क्षेत्र में आकर प्रतिष्ठित हो गए और तब से यह क्षेत्र शनिक्षेत्र के नाम से विख्यात हो गया।

  • आज भी मौजूद हैं शनिदेव के गिरने का निशान

    जब शनिदेव यहां आ कर गिरे तो उल्कापात सा हुआ। शिला के रूप में वहां शनिदेव के प्रतिष्ठित होने से एक बड़ा गड्ढा बन गया, जैसा कि उल्का गिरने से होता है। ये गड्ढा आज भी मौजूद है।

  • तेल चढ़ाने के बाद गले मिलने की परंपरा

    यहां शनि देव को तेल चढ़ाने के बाद उनसे गले मिलने की परंपरा प्रचलित है। जो भी यहां आता है वह शनिदेव को तेल चढ़ाने के बाद बड़े प्यार से शनि महाराज से गले मिलता है और अपनी तकलीफें उन से बांटता है। कहा जाता है कि ऐसा करने से शनिदेव उस व्यक्ति की सारी तकलीफें दूर कर देते हैं।

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