शिव मंदिर / उत्तराखंड के जागेश्वर धाम में बाल या तरूण रूप में होती है शिवजी की पूजा



Shiv temple: Jageshwar Dham almora uttarakhand
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Shiv temple: Jageshwar Dham almora uttarakhand

Dainik Bhaskar

Aug 12, 2019, 03:11 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क. उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है। यहां कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं जिनका वर्णन पुराणों में भी मिलता है। ऐसा ही एक धार्मिक स्थल है जागेश्वर धाम। इस धाम को भगवान शिव का पवित्र धाम माना जाता है। यहां की मान्यता के अनुसार जागेश्वर को भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में एक हैं। इस धाम का उल्लेख स्कंद पुराण, शिव पुराण और लिंग पुराण में भी मिलता है।

 

  • बाल या तरूण रूप में होती है शिव पूजा

जागेश्वर धाम में सारे मंदिर केदारनाथ शैली से बने हुए हैं। यहां के मंदिर करीब 2500 वर्ष पुराने माने जाते हैं। अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध इस मंदिर को भगवान शिव की तपस्थली के रूप में भी जाना जाता है। पुरातत्व विभाग के अधीन आने वाले इस मंदिर के किनारे एक पतली सी नदी की धारा बहती है। मान्यता है कि यहां सप्तऋषियों ने तपस्या की थी और यहीं से लिंग के रूप में भगवान शिव की पूजा शुरू हुई थी। खास बात यह है कि यहां भगवान शिव की पूजा बाल या तरुण रूप में भी की जाती है। 

 

  • शिलाओं से हुआ है निर्माण 

जागेश्वर धाम में भगवान शिव को समर्पित 124 छोटे-बड़े मंदिर हैं। मंदिरों का निर्माण बड़ी-बड़ी शिलाओं से किया गया है। कैलाश मानसरोवर के प्राचीन मार्ग पर स्थित इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि गुरु आदि शंकराचार्य ने केदारनाथ के लिए प्रस्थान करने से पहले जागेश्वर के दर्शन किए और यहां कई मंदिरों का जीर्णोद्धार और पुन: स्थापना भी की थी। 

 

  • श्रावणी मेले में आते हैं विदेशी भक्त 

पत्थर की मूर्तियों और नक्काशी मंदिर का मुख्य आकर्षण है। महा मृत्युंजय मंदिर यहां का सबसे पुराना है, जबकि दंडेश्वर मंदिर सबसे बड़ा मंदिर है। इसके अलावा भैरव, माता पार्वती, केदारनाथ, हनुमानजी, दुर्गाजी के मंदिर भी विद्यमान हैं। हर वर्ष यहां सावन के महीने में श्रावणी मेला लगता है। देश ही नहीं विदेशी भक्त भी यहां आकर भगवान शंकर का रूद्राभिषेक करते हैं।

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