त्रयोदशी पर किया जाता है बच्चों का श्राद्ध, इससे जुड़ी जानकारी और नियम

2 वर्ष पहले
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  • छ: साल से कम उम्र वाले बच्चों का श्राद्ध करना आवश्यक नहीं है

जीवन मंत्र डेस्क. मृत बच्चों के श्राद्ध के लिए त्रयोदशी तिथि शुभ मानी गई है। वैसे तो पितृपक्ष में बच्चे की मृत्यु तिथि पर ही उसका श्राद्ध किया जाता है, लेकिन तिथि ज्ञान न होने पर त्रयोदशी पर पूर्ण विधि विधान से किया गया श्राद्ध बच्चों की मृतात्मा को प्राप्त होता है। इस साल ये तिथि 26 सितंबर, गुरुवार को पड़ रही है। बच्चों की श्राद्ध को लेकर कई लोगों में भ्रम रहता है कि किस उम्र तक के बच्चे का श्राद्ध करना चाहिए। इस बारे में ग्रंथों में बालक और कन्याओं के लिए अलग-अलग स्थितियां और नियम बताए गए हैं।
 

बच्चों के श्राद्ध से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
 

  1. ज्योतिषाचार्य पं प्रवीण द्विवेदी के अनुसार जिन बालकों की आयु दो वर्ष या उससे कम होती है उनका श्रा़द्ध नहीं किया जाता है। कन्याओं के साथ भी यही नियम लागू होता है। उनका भी श्रा़द्ध करने की मनाही है। यदि बालक और कन्या की उम्र दो वर्ष से 6 वर्ष के बीच है तो इनका श्रा़द्ध तो नहीं होता परंतु मलिन षोडशी क्रिया जाती है। मलिन षोडशी क्रिया मृत्यु से अंतिम संस्कार तक के समय में की जाती है।
  2. इसके पश्चात जिन बालकों और कन्याओं की उम्र छह वर्ष से ज्यादा होती है मृत्युपरांत उनकी श्रा़द्ध की सम्पूर्ण क्रिया विधिविधान के साथ की जाती हैं। दस साल से ज्यादा उम्र की कन्याओं का पूर्ण विधि-विधान से श्रा़द्ध किया जाना चाहिए।
  3. जिन कन्याओं का विवाह हो चुका हो उनका श्रा़द्ध करने का अधिकार उसके सुसराल वालों को होता है। मायके में माता पिता को नहीं। वैसे किशोर हो चुके अविवाहितों का श्रा़द्ध पंचमी के दिन भी किया जा सकता है। इसीलिए इसे कुंवारा पंचमी भी कहते हैं।
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