--Advertisement--

कुंभ मेला / 12 होते हैं कुंभ, इनमें पृथ्वी पर होते हैं चार और आठ होते देवलोक में



special story about kumbh mela
X
special story about kumbh mela

Dainik Bhaskar

Jan 11, 2019, 01:03 PM IST

रिलिजन डेस्क. पौराणिक कथाओं के अनुसार अमृत प्राप्ति के लिए देव-दानवों में लगातार बारह दिन तक निरंतर युद्ध हुआ था। ज्योतिष बताती है कि देवताओं के बारह दिन मनुष्यों के बारह वर्ष के बराबर होते हैं। इसी लिए कुंभ भी बारह ही होते हैं, परंतु उनमें से सिर्फ चार पृथ्वी पर होते हैं और शेष आठ देवलोक में होते हैं। इन का लाभ देवगण ही प्राप्त कर सकते हैं, मनुष्यों नहीं।


ऐसे होती है गणना
कुंभ की गणना एक विशेष विधि से होती है जिसमें गुरू का अत्यंत महत्व है। नियमानुसार गुरू एक राशि लगभग एक वर्ष रहता है। यानि बारह राशियों में भ्रमण करने में उसे 12 वर्ष की अवधि लगती है। यही कारण है प्रत्येंक बारह साल बाद कुंभ उसी स्थान पर वापस आता है अर्थात प्रत्येेक बारह साल में कुंभ आयोजन स्थल दोहराया जाता है। इसी प्रकार गणना के अनुसार कुंभ के लिए निर्धारित चार स्थानों में अलग-अलग स्थान पर हर तीसरे वर्ष कुंभ का अयोजन किया जाता है। कुंभ के लिए निर्धारित चारों स्थानों में प्रयाग के कुंभ का विशेष महत्व होता है। हर 144 वर्ष बाद यहां महाकुंभ का आयोजन होता है क्योंकि देवताओं का बारहवां वर्ष पृथ्वी लोक के 144 वर्ष के बाद आता है।


राशि परिवर्तन से जुड़ा है कुंभ
पौराणिक विश्वास के साथ ही ज्योतिषियों के मतानुसार कुंभ का महत्व बृहस्पति के कुंभ राशि में प्रवेश तथा सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ भी जुड़ा है। ग्रहों की बदलती स्थिति ही कुंभ के आयोजन का आधार बनती है। आध्यात्मिक दृष्टि से भी अर्ध कुंभ के काल में ग्रहों की स्थिति एकाग्रता तथा ध्यान साधना के लिए उत्कृष्ट होती है।

Astrology
Click to listen..