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नवरात्र विशेष / देवताओं से शक्ति पाकर देवी ने किया था महिषासुर का वध



story of durga maa incarnation
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story of durga maa incarnation

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2018, 03:20 PM IST

रिलिजन डेस्क. इन दिनों शारदीय नवरात्र का पर्व चल रहा है। इस पर्व में मुख्य रूप से देवी भगवती की उपासना की जाती है। देवी भगवती ने असुरों का वध करने के लिए कई अवतार लिए। सर्वप्रथम महादुर्गा का अवतार लेकर देवी ने महिषासुर का वध किया था। दुर्गा सप्तशती में देवी के अवतार के बारे में बताया गया है। ऐसा लिया देवी दुर्गा ने अवतार...

 

- एक बार महिषासुर नामक असुरों के राजा ने अपने बल और पराक्रम से देवताओं से स्वर्ग छिन लिया। जब सारे देवता भगवान शंकर व विष्णु के पास सहायता के लिए गए। पूरी बात जानकर शंकर व विष्णु को क्रोध आया तब उनके तथा अन्य देवताओं से मुख से तेज प्रकट हुआ, जो नारी स्वरूप में परिवर्तित हो गया।


- शिव के तेज से देवी का मुख, यमराज के तेज से केश, विष्णु के तेज से भुजाएं, चंद्रमा के तेज से वक्षस्थल, सूर्य के तेज से पैरों की अंगुलियां, कुबेर के तेज से नाक, प्रजापति के तेज से दांत, अग्नि के तेज से तीनों नेत्र, संध्या के तेज से भृकुटि और वायु के तेज से कानों की उत्पत्ति हुई।


- इसके बाद देवी को शस्त्रों से सुशोभित भी देवों ने किया। भगवान शंकर ने मां शक्ति को अपना त्रिशूल भेंट किया। अग्निदेव ने अपनी शक्ति देवी को प्रदान की। भगवान विष्णु ने देवी को अपना सुदर्शन चक्र प्रदान किया।


- वरुणदेव ने शंख भेंट कर माता का सम्मान किया। पवनदेव ने देवी को धनुष और बाण दिए। देवराज इंद्र ने देवी को वज्र और घंटा अर्पित किया। यमराज ने मां दुर्गा को कालदंड भेंट किया।


- प्रजापति दक्ष ने स्फटिक की माला प्रदान की। परमपिता ब्रह्मा ने अपनी ओर से कमंडल भेंट किया। सूर्यदेव ने माता को अपना तेज प्रदान किया। समुद्रदेव ने आभूषण (हार, वस्त्र, चूड़ामणि, कुंडल, कड़े, अर्धचंद्र और रत्नों की अंगूठियां) भेंट किए।


- सरोवरों ने कभी न मुरझाने वाली माला माता को अर्पित की। कुबेरदेव ने शहद से भरा पात्र (बर्तन) दिया। पर्वतराज हिमालय ने मां दुर्गा को सवारी करने के लिए शक्तिशाली शेर भेंट किया।


- देवताओं से शक्तियां प्राप्त कर महादुर्गा ने युद्ध में महिषासुर का वध कर देवताओं को पुन: स्वर्ग सौंप दिया। महिषासुर का वध करने के कारण उन्हें ही महिषासुरमर्दिनी भी कहा जाता है।
 

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