ज्ञान की बात / इंसान भौतिक सुख-सुविधाओं में उलझा रहता है और भगवान की भक्ति नहीं कर पाता



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  • शिष्य ने संत से पूछा कि ईश्वर ने मनुष्य को संसार में क्यों भेजा है?

Dainik Bhaskar

Jun 12, 2019, 06:18 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। रामकृष्ण परमहंसजी के जीवन के कई प्रसंग ऐसे हैं जो हमें सुखी जीवन की सीख देते हैं। ऐसा ही एक प्रसंग यहां जानिए...
> एक दिन रामकृष्ण परमहंसजी धर्म और ज्ञान की बातें कर रहे थे, तभी एक शिष्य ने उनसे पूछा कि गुरुदेव ईश्वर ने मनुष्य को इस संसार में क्यों भेजा है?
> परमहंसजी ने जवाब देते हुए कहा कि ईश्वर ने मनुष्य को सृष्टि के निर्माण के लिए भेजा है। ये संसार ईश्वर की ही माया है। भगवान ने इंसान को भौतिक सुख-सुविधाओं में उलझा रखा है।
> शिष्य ने पूछा कि भगवान ने इंसान को सुख-सुविधाओं में क्यों उलझा रखा है? क्या ये भी भगवान की ही इच्छा है?
> परमहंसजी ने कहा कि हां ये भी भगवान की ही इच्छा है। ईश्वर मनुष्य को ईश्वरीय आनंद नहीं देते हैं, अगर इंसान को ये आनंद मिल जाएगा तो ये संसार ही नहीं रहेगा, सभी भगवान की शरण में चले जाएंगे, ये सृष्टि चलना ही बंद हो जाएगी। इसीलिए ईश्वर मनुष्य को अपने माया जाय में उलझाए रखते हैं।
> जब शिष्य की जिज्ञासा शांत नहीं हुई तो परमहंसजी ने उसे एक उदाहरण देते हुए समझाया कि जिस तरह गोदामों में चावल भरा रहता है और मालिक ये डर रहता है कि कहीं से चूहे न आ जाए, वरना सारा चावल नष्ट हो जाएगा। इसी वजह से गोदाम का मालिक गोदाम के बाहर गुड़ और खील रख देता है, जिससे चूहे वहां आए और मीठे स्वाद में डूबे रहे और चावल की खोद में गोदाम में प्रवेश न करे।
> भगवान ने भी मनुष्य के लिए सुख-सुविधाएं फैला रखी हैं, व्यक्ति इन्हीं उलझा रहता है और भगावन की भक्ति तक नहीं पहुंच पाता है। जबकि असली आनंद तो भगवान की भक्ति में है। ये बहुत कम लोग समझ पाते हैं।

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