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प्रेरक प्रसंग : गांव में सांप का आतंक था, एक बार वहां संत आए, उन्होंने एक मंत्र बोला तो सांप ने इंसानों को डंसना और डराना बंद कर दिया, गांव के लोग सांप को पत्थर मारते, लेकिन वह कुछ नहीं करता

dainikbhaskar.com

Apr 16, 2019, 04:11 PM IST

आत्म रक्षा के लिए दुष्ट लोगों को डराने में बुराई नहीं है, लेकिन किसी को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए

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रिलिजन डेस्क। एक पुरानी चर्चित लोक कथा के अनुसार किसी गांव में सांप का बहुत आतंक था। सांप गांव से बाहर रहता था, लेकिन आते-जाते लोगों को डंस लेता था। इस वजह से गांव के लोग उस रास्ते पर जाने से डरते थे। एक दिन गांव में प्रसिद्ध और विद्वान संत आए। कुछ दिन गांव में रुकने के बाद उन्हें दूसरे गांव जाना था।

> संत को उसी रास्ते से जाना था, जहां सांप रहता था। गांव के लोगों ने संत को मना किया कि वे उस रास्ते से न जाएं, क्योंकि वहां सांप है। संत ने कहा कि मुझे सांप का डर नहीं है, मैं एक मंत्र जानता हूं, जिससे वह मुझे नहीं डंसेगा।

> संत उस रास्ते पर आगे बढ़ने लगे। तभी उनके सामने वह सांप आ गया और संत को डंसने की कोशिश करने लगा। संत ने एक मंत्र का जाप किया। मंत्र जाप के बाद सांप संत के चरणों में आ गया, लेकिन डंसा नहीं।

> संत ने सांप से कहा कि तू अब किसी को नहीं डंसेगा। भगवान की भक्ति कर तेरा कल्याण हो जाएगा। उस दिन के बाद सांप ने दूसरों को डंसना और डराना छोड़ दिया।

> जब गांव के लोगों के ये मालूम हुआ कि सांप अब हिंसा नहीं करता है तो वे उसे सताने लगे। आते-जाते समय सांप को पत्थर मारने लगे थे। एक दिन किसी व्यक्ति ने सांप की पूंछ पकड़कर उठा लिया और जोर से जमीन पर पटक दिया। चोट लगने से सांप बेहोश हो गया। उस व्यक्ति के जाने के बाद जब सांप को होश आया तो वह चुपचाप अपने बिल में चले गया। उस दिन के बाद सांप ने बिल से बाहर निकलना ही बंद कर दिया। धीरे-धीरे वह और ज्यादा कमजोर होने लगा।

> कुछ समय बाद वह संत फिर उस गांव में आए, उन्हें मालूम हुआ कि गांव के लोगों ने सांप के साथ कैसा व्यवहार किया है तो वे सांप को ढूंढते हुए उसके बिल के पास पहुंच गए। सांप को आवाज लगाई, संत की आवाज सुनकर सांप बाहर आ गया।

> संत ने उससे कहा कि मैंने तुम्हें डंसने के लिए मना किया था। खुद की रक्षा के लिए तुम्हें फूंफकारना नहीं छोड़ना चाहिए। तुम लोगों को डरा सकते हो, ताकि दुष्ट लोग तुम्हें कोई नुकसान न पहुंचा सके। बस किसी को डंसना नहीं है। सांप को संत की बात समझ आ गई। उस दिन के बाद से सांप का व्यवहार फिर से बदल गया। अब वो उन लोगों को डराने लगा जो उसे सताते थे।

कथा की सीख

इस कथा की सीख यह है कि अगर कोई हमें परेशान करता है तो हमें भी आत्म रक्षा करने का अधिकार है। आत्म रक्षा के लिए दुष्ट लोगों को डराने में कोई बुराई नहीं है। हमें बस इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हमारी वजह से किसी का नुकसान न हो।

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