स्वामी विवेकानंद जयंती आज : जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करेंगे तब तक आप भगवान पर भी विश्वास नहीं कर सकते / स्वामी विवेकानंद जयंती आज : जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करेंगे तब तक आप भगवान पर भी विश्वास नहीं कर सकते

dainikbhaskar.com

Jan 11, 2019, 05:22 PM IST

स्वामी विवेकानंद की 10 बातें ध्यान रखेंगे तो आपकी हर परेशानी हो सकती है दूर

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रिलिजन डेस्क। Swami Vivekananda Birth Anniversary 2019: रामकृष्ण परमहंस (Sri Ramakrishna Paramhansa) के प्रिय शिष्य स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda ) की जयंती 12 जनवरी को है। वे विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु थे। 1893 में अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म महासभा हुई थी, जिसमें विवेकानंदजी (Swami Vivekananda ) ने भाषण दिया। इस भाषण के बाद उन्हें काफी ख्याति मिली थी। उन्होंने रामकृष्ण परमहंस मिशन (Ramakrishna Paramhansa Mission)की शुरुआत की थी।

यहां जानिए स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda ) के कुछ ऐसे विचार, जिनका ध्यान रखने पर आप सफलता हासिल कर सकते हैं...

> जिस समय जिस काम के लिए प्रतिज्ञा करो, ठीक उसी समय पर उसे करना ही चाहिए, नहीं तो लोगों का आप पर से विश्वास उठ जाता है।

> हम वो हैं, जो हमें हमारी सोच ने बनाया है। इसलिए इस बात का धयान रखें कि आप क्या सोचते हैं। जैसा आप सोचते हैं वैसे बन जाते हैं।

> जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते, तब तक आप भगवान पर विश्वास नहीं कर सकते।

> सत्य को हजार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा।

> जिस दिन आपके सामने कोई समस्या न आए, आप यकीन कर सकते हैं कि आप गलत रास्ते पर चल रहे हैं।

> हम जितना ज्यादा बाहर जाए और दूसरों का भला करें, हमारा हृदय उतना ही शुद्ध होगा और परमात्मा उसमें वास करेंगे।

> भला हम भगवान को खोजने कहां जा सकते हैं, अगर उसे अपने हृदय और हर एक जीवित प्राणी में नहीं देख सकते।

> आपको अंदर से बाहर की ओर विकसित होना है। कोई तुम्हें पढ़ा नहीं सकता, कोई तुम्हें आध्यात्मिक नहीं बना सकता. तुम्हारी आत्मा के आलावा कोई और गुरु नहीं है।

> पहले हर अच्छी बात का मजाक बनता है, फिर उसका विरोध होता है और फिर उसे स्वीकार कर लिया जाता है।

> किसी भी चीज से मत डरो। तुम अद्भुत काम करोगे। यह निर्भयता ही है जो पलभर में परम आनंद लाती है।

कौन थे स्वामी विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद का जन्म कोलकाता में 12 जनवरी 1863 को हुआ था। स्वामी जी के पिता का नाम विश्वनाथ दत्त और माता का नाम भुवनेश्वरी देवी था। स्वामी जी का मूल नाम नरेंद्रनाथ था, लोग उन्हें नरेन के नाम से भी जानते थे। इनके पिता कोलकाता हाईकोर्ट में अटार्नी ऑफ लॉ थे। स्वामी जी ने कोलकाता के कॉलेज से बी.ए. और लॉ की डिग्री हासिल की थी। लेकिन, उनका मन अध्यात्म की ओर ज्यादा था।

कैसे पड़ा विवेकानंद नाम
नरेंद्र नाथ को विवेकानंद नाम उनके गुरु काली माता के भक्त स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने दिया था। नरेंद्र अद्भुत प्रतिभा के धनी थे और वेदांत पर काफी अच्छी पकड़ थी। विषयों के गहन चिंतन और अध्ययन में उनकी बुद्धि-विवेक को देखकर ही रामकृष्ण परमहंस ने उन्हें सन्यास के बाद विवेकानंद नाम दिया।

क्यों शिकागो गए थे विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद को विश्वपटल पर पहचान शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन से मिली। इस सम्मेलन में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया था। ये सम्मेलन उनकी पहचान बन गया क्योंकि उन्हें वहां बोलने के लिए सबसे कम समय दिया गया था लेकिन पहले ही वाक्य बोलने के बाद उनके सम्मान में काफी देर तक तालियां बजती रहीं। वो वाक्य था मेरे प्यारे अमेरिकन भाइयों और बहनों।

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