एक महिला ने स्वामीजी से कहा कि मेरी एक आंख बहुत फड़क रही है, लगता कुछ गलत होने वाला है, कृपया कोई उपाय बताएं, स्वामीजी ने क्या जवाब दिया? / एक महिला ने स्वामीजी से कहा कि मेरी एक आंख बहुत फड़क रही है, लगता कुछ गलत होने वाला है, कृपया कोई उपाय बताएं, स्वामीजी ने क्या जवाब दिया?

dainikbhaskar.com

Jan 10, 2019, 06:07 PM IST

समय अच्छा-बुरा कैसा भी हो, व्यक्ति सिर्फ अच्छे काम करते रहना चाहिए

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रिलिजन डेस्क। Swami Vivekananda Jayanti 2019: शनिवार, 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद(Swami Vivekananda Jayanti) का जन्मदिन है। उनका जन्म 12 जनवरी सन् 1863 को कोलकाता (कलकत्ता) के में हुआ था। पहले उनका नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। उनके पिता का नाम विश्वनाथ दत्त और माता का नाम भुवनेश्वरी देवी था स्वामीजी (Swami Vivekananda) की मृत्यु 4 जुलाई, 1902 को हुई थी। स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) के जीवन के कई ऐसे प्रसंग हैं, जिनसे सुखी और सफल जीवन की प्रेरणा मिलती है। यहां जानिए एक ऐसा प्रसंग, जिसमें कर्म का महत्व बताया गया है...

> एक महिला ने स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)से कहा कि स्वामीजी कुछ दिनों से मेरी एक आंख बहुत फड़क रही है, ऐसा लगता है कुछ अशुभ होने वाला है। कृपया मुझे कोई ऐसा उपाय बताएं, जिससे ये अपशकुन टाला जा सके।

> महिला की बात सुनकर विवेकानंद (Swami Vivekananda)ने कहा कि देवी, मेरी नजर में तो शुभ और अशुभ कुछ नहीं है। जीवन में अच्छी और बुरी दोनों तरह की घटनाएं होती हैं। लोग उन्हें अपनी सोच के अनुसार शुभ-अशुभ मान लेते हैं।

> ये बात सुनकर महिला ने कहा कि स्वामीजी (Swami Vivekananda) मैंने अपने पड़ोसियों के यहां हमेशा सुख बना रहता है। जबकि मेरे घर में कुछ न कुछ अशुभ होता रहता है।

> स्वामी विवेकानंद(Swami Vivekananda) ने कहा कि शुभ और अशुभ सोच का ही फल है। कोई भी ऐसी वस्तु नहीं है, जिसे सिर्फ शुभ या सिर्फ अशुभ बोला जा सके।

> जो चीज आज शुभ है, वही कल अशुभ भी हो सकती है। जो बात किसी एक के लिए शुभ है, वही किसी दूसरे के लिए अशुभ हो सकती है। यह सब परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

> ये सुनकर महिला ने पूछा कि स्वामीजी (Swami Vivekananda)ऐसा कैसे हो सकता है कोई बात एक के लिए शुभ और दूसरे के लिए अशुभ हो।

> स्वामीजी (Swami Vivekananda)ने जवाब दिया कि एक कुम्हार बर्तन बनाकर सुखाने के लिए रखता है और तेज धूप की कामना करता है। उसी समय दूसरी ओर एक किसान वर्षा की कामना करता है, ताकि उसकी फसल अच्छी हो सके।

> इस स्थिति में धूप और वर्षा एक के लिए शुभ है और दूसरे के लिए अशुभ। इसीलिए हमें शुभ-अशुभ नहीं सोचना चाहिए। बल्कि हमेशा अच्छे काम करते रहना चाहिए।

> स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)की ये बातें सुनकर महिला ने कहा कि स्वामीजी आपका सही कह रहे हैं। अब से मैं सिर्फ अपने काम पर ध्यान दूंगी।

कौन थे स्वामी विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद का जन्म कोलकाता में 12 जनवरी 1863 को हुआ था। स्वामी जी के पिता का नाम विश्वनाथ दत्त और माता का नाम भुवनेश्वरी देवी था। स्वामी जी का मूल नाम नरेंद्रनाथ था, लोग उन्हें नरेन के नाम से भी जानते थे। इनके पिता कोलकाता हाईकोर्ट में अटार्नी ऑफ लॉ थे। स्वामी जी ने कोलकाता के कॉलेज से बी.ए. और लॉ की डिग्री हासिल की थी। लेकिन, उनका मन अध्यात्म की ओर ज्यादा था।

कैसे पड़ा विवेकानंद नाम
नरेंद्र नाथ को विवेकानंद नाम उनके गुरु काली माता के भक्त स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने दिया था। नरेंद्र अद्भुत प्रतिभा के धनी थे और वेदांत पर काफी अच्छी पकड़ थी। विषयों के गहन चिंतन और अध्ययन में उनकी बुद्धि-विवेक को देखकर ही रामकृष्ण परमहंस ने उन्हें सन्यास के बाद विवेकानंद नाम दिया।

क्यों शिकागो गए थे विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद को विश्वपटल पर पहचान शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन से मिली। इस सम्मेलन में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया था। ये सम्मेलन उनकी पहचान बन गया क्योंकि उन्हें वहां बोलने के लिए सबसे कम समय दिया गया था लेकिन पहले ही वाक्य बोलने के बाद उनके सम्मान में काफी देर तक तालियां बजती रहीं। वो वाक्य था मेरे प्यारे अमेरिकन भाइयों और बहनों।

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