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गुड फ्राइडे / इस दिन का इतिहास दुखदायी है, लेकिन प्रेम और क्षमा का महत्व बताता है यीशु का बलिदान दिवस

Dainik Bhaskar

Apr 16, 2019, 07:08 PM IST


the significance of love and forgiveness reveals the sacrifice of jesus
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the significance of love and forgiveness reveals the sacrifice of jesus
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  • 19 अप्रैल को गुड फ्राइडे और 21 अप्रैल को मनाया जाएगा ईस्टर
  • मान्यता है कि गुड फ्राइडे के तीसरे दिन ईसा मसीह दोबारा जीवित हो गए थे

रिलिजन डेस्क. गुड फ्राइडे के नाम में भले ही गुड यानि किसी अच्छे की अनुभूति हो लेकिन इस दिन का इतिहास दुखदायी है, दर्दनाक है, त्रासदीपूर्ण है। क्योंकि यही वो दिन है जब दुनिया को मानवता का उपदेश देने वाले, सहनशीलता का पाठ पढ़ाने वाले, क्षमा करने की प्रेणा देने वाले ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था। लेकिन ईश्वर के इस पुत्र ने तब भी प्रभु से यही प्रार्थना की कि हे ईश्वर इन्हें माफ करना ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं। उन्हीं के बलिदान दिवस को गुड फ्राइडे के रुप में मनाते हैं। इस बार यह 19 अप्रैल को मनाया जाएगा।

अंतिम 7 वाक्यों की होती है व्याख्या

    • गुड फ्राइडे के दिन ईसा के अंतिम सात वाक्यों की विशेष व्याख्या की जाती है, जो क्षमा, मेल-मिलाप, सहायता और त्याग पर केंद्रित हैं। कुछ जगहों पर लोग काले कपड़े धारण कर यीशु के बलिदान दिवस पर शोक भी व्यक्त करते हैं।
    • इस दिन चर्च में लकड़ी के खटखटे से आवाज की जाती है। लोग भगवान ईसा मसीह के प्रतीक क्रॉस को चूमकर भगवान को याद करते हैं। गुड फ्राइडे के दौरान दुनियाभर के ईसाई चर्च में सामाजिक कार्यों को बढ़ावा देने के लिए चंदा या दान देते हैं।

  1. क्रॉस को चूमकर करते हैं याद

    • बाल्टिमोर कैटेशिज्म के अनुसार गुड फ्राइडे को गुड इसलिए कहा जाता है क्योंकि ईसा मसीह ने अपनी मृत्यु के बाद पुन: जीवन धारण किया और यह संदेश दिया कि हे मानव मैं सदा तुम्हारे साथ हूं और तुम्हारी भलाई करना मेरा उद्देश्य है। यहां गुड का मतलब हॉली (अंग्रेजी शब्द) यानी पवित्र से है।
    • इसलिए गुड फ्राइडे को हॉली फ्राइडे, ब्लैक फ्राइडे या ग्रेट फ्राइडे भी कहते हैं। गुड फ्राइडे के दिन ईसाई धर्म को मानने वाले अनुयायी गिरजाघर जाकर प्रभु यीशु को याद करते हैं।

  2. 40 दिन पहले शुरू हो जाता है उपवास

    • अनेक लोग इस बलिदान के लिए ईसा मसीह की कृतज्ञता व्यक्त करते हुए 40 दिन पहले से उपवास भी रखते हैं। जो ‘लेंट’ कहलाता है, तो कोई केवल शुक्रवार को ही व्रत रखकर प्रेयर (प्रार्थना) करते हैं। इस दौरान शाकाहारी और सात्विक भोजन पर जोर दिया जाता है।
    • फिर गुड फ्राइडे के दिन ईसाई धर्म को मानने वाले अनुयायी गिरजाघर जाकर प्रभु यीशु को याद करते हैं। इस दिन भक्त उपवास के साथ प्रार्थना और मनन करते हैं। चर्च और घरों से सजावट की वस्तुएं हटा ली जाती हैं या उन्हें कपडे़ से ढक दिया जाता है।

  3. दोबारा जीवित होकर 40 दिन का दिया उपदेश

    • ईसाई धर्म के मानने वालों का विश्वास है कि गुड फ्राइडे के तीसरे दिन यानी उसके अगले संडे को ईसा मसीह दोबारा जीवित हो गए थे, इसे ईस्टर संडे कहते हैं। ईसा मसीह अपने शिष्यों के लिए वापस आए थे और 40 दिनों तक उनके बीच जाकर उपदेश देते रहे।
    • प्रभु ईसा मसीह के आगमन के इंतजार में शनिवार को ही देशभर में प्रार्थना सभाएं शुरू हो जाती हैं। ईस्टर की आराधना प्रातःकाल में महिलाओं द्वारा की जाती है क्योंकि इसी वक्त यीशु का पुनरुत्थान हुआ था इसे सनराइज सर्विस कहते हैं।

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