पूजा-पाठ / आज देवशयनी एकादशी, सूर्यास्त के बाद करनी चाहिए तुलसी की भी पूजा



tulsi puja, devshayani ekadashi 2019, we should remember these tips on dev shayani ekadashi
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tulsi puja, devshayani ekadashi 2019, we should remember these tips on dev shayani ekadashi

  • 12 जुलाई की शाम तुलसी नामाष्टक मंत्र का जाप करें और लाल वस्त्र अर्पित करें

Dainik Bhaskar

Jul 12, 2019, 01:38 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। शुक्रवार, 12 जुलाई आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। इस एकादशी को देवशयनी और हरिशयनी एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि इस तिथि से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली देवउठनी एकादशी तक भगवान विष्णु शयन करते हैं। इन चार महीनों में भगवान शिव सृष्टि का पालन करते हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार इस तिथि पर भगवान विष्णु और उनके अवतारों की विशेष पूजा की जाती है। एकादशी पर श्रीहरि के साथ ही तुलसी की पूजा करने की परंपरा है। श्रीकृष्ण की पूजा में भी तुलसी का विशेष महत्व है। तुलसी को देवी लक्ष्मी का स्वरूप भी माना गया है। इसलिए एकादशी पर तुलसी पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। एकादशी की शाम तुलसी के दीपक जलाकर मंत्र जाप करना चाहिए। ध्यान रखें सूर्यास्त के बाद तुलसी को जल नहीं चढ़ाना चाहिए और स्पर्श भी नहीं करना चाहिए। तुलसी पूजा करते समय तुलसी नामाष्टक मंत्र का जाप करना चाहिए...

  • ये है तुलसी नामाष्टक मंत्र

वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी। पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।
एतनामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम। य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलभेत।।

  • ऐसे करें इस मंत्र का जाप

> स्नान के बाद तुलसी की पूजा और परिक्रमा करें। तुलसी के पौधे को गंध, फूल, लाल वस्त्र अर्पित करें। फल का भोग लगाएं। घी का दीप जलाएं। इसके बाद तुलसी के सामने बैठकर तुलसी की माला से इस मंत्र का जाप करें।
> मंत्र जाप करते समय मुंह पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। मंत्र जाप कम से कम 108 बार करें। जाप के बाद भगवान से परेशानियां दूर करने की प्रार्थना करें और पूजा में हुई भूल-चूक की क्षमा प्रार्थना करें।
> तुलसी के पास बैठकर तुलसी की माला की मदद से तुलसी गायत्री मंत्र का जाप भी किया जा सकता है। मंत्र जाप कम से कम 108 बार करना चाहिए।
ऊँ श्री तुलस्यै विद्महे। विष्णु प्रियायै धीमहि। तन्नो वृन्दा प्रचोदयात्।।

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