उत्सव / 59 साल बाद देवउठनी एकादशी पर गुरु-शनि का धनु राशि में योग, इस दिन तुलसी पूजा करने की परंपरा

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  • कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी पर भगवान विष्णु विश्राम से जागते हैं, अब सभी मांगलिक कार्य हो जाएंगे शुरू

दैनिक भास्कर

Nov 06, 2019, 05:07 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। शुक्रवार, 8 नवंबर को देव उठनी एकादशी है। इस दिन तुलसी और शालिग्राम का विवाह कराने की परंपरा है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार इस साल देवउठनी एकादशी पर शनि और गुरु धनु राशि में रहेंगे। धनु राशि का स्वामी गुरु है। इस साल से 59 साल पहले 30 अक्टूबर 1960 को देवउठनी एकादशी पर गुरु-शनि का योग धनु राशि में था। इस बार धनु राशि में शनि और गुरु के साथ केतु भी रहेगा। ऐसा योग 1209 साल पहले बना था। 16 अक्टूबर 810 को गुरु, शनि और केतु का योग धनु राशि में था, उस दिन भी देवउठनी एकादशी मनाई गई थी।

देवउठनी एकादशी से जुड़ी खास बातें

  • शुक्रवार, 8 नवंबर को देवउठनी या देवोत्थापनी एकादशी का पर्व है। इस तिथि पर भगवान विष्णु चार माह के विश्राम के बाद जागते हैं। भगवान विष्णु के शयनकाल में प्राण-प्रतिष्ठा, निर्माण और विवाहादि शुभ कार्य वर्जीत रहते हैं। इस एकादशी से सभी मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाएंगे।
  • प्राचीन कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने पराक्रमी राक्षस शंखासुर का वध किया था और थकावट मिटाने के लिए क्षीरसागर में विश्राम किया था। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी से कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तक इन चार माह में भगवान विश्राम करते हैं।
  • भगवान विष्णु के शयन के चार माह वर्षा ऋतु के होते हैं। प्राचीन काल में इस समय नदी-नालों मे उफान रहता था, यात्रा के लिए ये समय अच्छा नहीं माना जाता था। वर्षा काल में कई प्रकार के जीव-जंतु भी उत्पन्न होते हैं। कई लोगों के एक साथ एकत्रित होने से और इंसानों के प्रवास करने से अनजाने में इन जीव-जंतुओं की हत्या हो जाती थी। इस पाप से बचने के लिए इस काल में एक ही जगह निवास करने और संयम से रहने का विधान किया गया था।
  • देवउठनी एकादशी से मौसम अच्छा हो जाता है। वातावरण हर तरह से मनुष्यों के लिए अनुकूल हो जाता है। एकादशी को पूजन पाठ और भगवान शालिग्राम के साथ तुलसी का विवाह किया जाता है।
  • इस तिथि पर उपवास करना चाहिए या एक बार फलाहार करना चाहिए। भगवान के मंत्रों का जाप करें, भजन करें और रात्रि जागरण करें। देवउठनी एकादशी के साथ ही अगले दिन यानी शनिवार, 9 नवंबर से चातुर्मास भी समाप्त हो जाएगा। इस तिथि पर प्रसिद्ध संत नामदेवजी की जयंती भी है।

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