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हरसिद्धि मंदिर / 51 फीट ऊंचे 2 दीप स्तंभों को जलाने में लगता है 60 लीटर तेल और 4 किलो रुई



ujjain harisiddhi mandir
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Dainik Bhaskar

Oct 11, 2018, 05:18 PM IST

रिलिजन डेस्क. मध्य प्रदेश के उज्जैन में हरसिद्धि मंदिर है जो माता के 51 शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है कि इस स्थान पर देवी सती की कोहनी गिरी थी। यूं तो इसकी और भी कई विशेषताएं हैं, लेकिन एक खास बात जो लोगों के आकर्षण का केंद्र है, वो है मंदिर प्रांगण में स्थापित 2 दीप स्तंभ। ये दीप स्तंभ लगभग 51 फीट ऊंचे हैं। दोनों दीप स्तंभों में मिलाकर लगभग 1 हजार 11 दीपक हैं। मान्यता है कि इन दीप स्तंभों की स्थापना उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य ने करवाई थी। विक्रमादित्य का इतिहास करीब 2 हजार साल पुराना है। इस दृष्टिकोण से ये दीप स्तंभ लगभग 2 हजार साल से अधिक पुराने हैं।

जाने इस शक्तिपीठ के बारे में खास बातें

  1. अब हर रोज जलाए जाते हैं दीप स्तंभ

    दीप स्तंभों पर चढ़कर हजारों दीपकों को जलाना सहज नहीं है, लेकिन उज्जैन निवासी जोशी परिवार लगभग 100 साल से इन दीप स्तंभों को रोशन कर रहा है। 

     

    • वर्तमान में मनोहर व राजेंद्र जोशी इस परंपरा को कायम रखे हुए है। इनका साथ देते हैं रामचंद्र फुलेरिया व ओमप्रकाश चौहान। 
    • दोनों दीप स्तंभों को एक बार जलाने में लगभग 4 किलो रूई की बाती व 60 लीटर तेल लगता है। समय-समय पर इन दीप स्तंभों की साफ-सफाई भी की जाती है
    • हरसिद्धि मंदिर प्रबंध समिति के प्रबंधक अवधेश जोशी ने बताया कि पहले नवरात्रि में तथा कुछ प्रमुख त्योहारों पर ही दीप स्तंभ जलाए जाते थे, लेकिन पिछले कुछ सालों से श्रृद्धालुओं के सहयोग से हर रोज ये दीप स्तंभ जलाए जाते हैं।

  2. 100 साल से एक ही परिवार कर रहा दीप स्तंभों को रोशन

    दीप स्तंभों पर चढ़कर हजारों दीपकों को जलाना सहज नहीं है, लेकिन उज्जैन निवासी जोशी परिवार लगभग 100 साल से इन दीप स्तंभों को रोशन कर रहा है।

     

    • वर्तमान में मनोहर व राजेंद्र जोशी इस परंपरा को कायम रखे हुए है। इनका साथ देते हैं रामचंद्र फुलेरिया व ओमप्रकाश चौहान। 
    • दोनों दीप स्तंभों को एक बार जलाने में लगभग 4 किलो रूई की बाती व 60 लीटर तेल लगता है। समय-समय पर इन दीप स्तंभों की साफ-सफाई भी की जाती है
       

  3. पहले से हो जाती है बुकिंग

    हरसिद्धि मंदिर के ये दीप स्तंभ श्रृद्धालुओं के सहयोग से जलाए जाते हैं। इसके लिए हरसिद्धि मंदिर प्रबंध समिति में पहले बुकिंग कराई जाती है।

     

    • प्रमुख त्योहारों जैसे- शिवरात्रि, चैत्र व शारदीय नवरात्रि, धनतेरस व दीपावली पर दीप स्तंभ जलाने की बुकिंग तो साल भर पहले ही श्रृद्धालुओं द्वारा करवा दी जाती है। 
    • कई बार श्रृद्धालु की बारी आते-आते महीनों लग जाते हैं। पहले के समय में चैत्र व शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि तथा प्रमुख त्योहारों पर ही दीप स्तंभ जलाए जाते थे, लेकिन अब रोज दीप स्तंभ जलाए जाते हैं।

  4. विक्रमादित्य ने 11 बार सिर चरणों में चढ़ाया

    उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य माता हरसिद्धि के परम भक्त थे। किवदंती है कि हर बारह साल में एक बार वे अपना सिर माता के चरणों में अर्पित कर देते थे, लेकिन माता की कृपा से पुन: नया सिर मिल जाता था।

     

    • बारहवीं बार जब उन्होंने अपना सिर चढ़ाया तो वह फिर वापस नहीं आया। इस कारण उनका जीवन समाप्त हो गया। आज भी मंदिर के एक कोने में 11 सिंदूर लगे रुण्ड पड़े हैं। कहते हैं ये उन्हीं के कटे हुए मुण्ड हैं।

  5. रात में विशेष पूजा

    रात को हरसिद्धि मंदिर के पट (दरवाजे) बंद होने के बाद गर्भगृह में विशेष पर्वों के अवसर पर पूजा होती है। श्रीसूक्त और वेदोक्त मंत्रों के साथ होने वाली इस पूजा का तांत्रिक महत्व है। भक्तों की मनोकामना के लिए विशेष तिथियों पर भी यह पूजा होती है।

  6. कब जाएं?

    वैसे तो यहां की तीर्थयात्रा कभी भी की जा सकती है, लेकिन सबसे अच्छा समय है अक्टूबर से जून का। अक्टूबर में यहां आश्विन नवरात्रि के अवसर पर अनेक धार्मिक आयोजन होते हैं। रात्रि को आरती में एक उल्लासमय वातावरण होता है।

  7. कैसे जाएं?

    उज्जैन मध्य प्रदेश का एक प्रमुख शहर है इसलिए यहां पहुंचने के लिए बस, रेल व वायु सेवा उपलब्ध है। वायु सेवा करीब 57 किलोमीटर दूर स्थित इंदौर और राजधानी भोपाल तक उपलब्ध है। मंदिर से रेल्वे स्टेशन व बस स्टैंड की दूरी करीब 1 किलोमीटर है।

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