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Vaishno Devi : माता रानी के भक्तों के लिए सुनहरा अवसर, मां वैष्णो देवी की प्राचीन गुफा के रास्ते से कर सकेंगे देवी मां के दर्शन

वैष्णो देवी ने इसी गुफा में भैरव को अपने त्रिशूल से मारा था, गुफा से जुड़ी ऐसी ही मान्यताएं

Dainik Bhaskar

Jan 13, 2019, 12:00 PM IST
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रिलिजन डेस्क। माता के भक्त बड़ी संख्या में वैष्णो देवी (Vaishno Devi) के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ये मंदिर भारत ही नहीं दुनियाभर में प्रसिद्ध है। माता का ये पवित्र तीर्थ जम्मू-कश्मीर की त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित है। हर साल जनवरी-फरवरी के दिनों में वैष्णोदेवी आने वाले भक्तों की संख्या काफी कम हो जाती है। इस कारण यहां प्राचीन गुफा भक्तों के लिए खोल दी जाती है। इस साल भी मकर संक्रांति, 14 जनवरी से प्राचीन गुफा के रास्ते से भक्त माता रानी के दर्शन कर सकेंगे। यहां जानिए प्राचीन वैष्णो देवी और गुफा से जुड़ी कुछ खास बातें...

मंदिर के साथ ही गुफा का भी है काफी अधिक महत्व

यहां एक गुफा में माता रानी भक्तों को दर्शन देती हैं। जितना महत्व वैष्णो देवी का है, उतना ही महत्व यहां की गुफा का भी है। देवी के मंदिर तक पहुंचने के लिए एक प्राचीन गुफा का प्रयोग किया जाता था। यह गुफा बहुत ही चमत्कारी है।

गुफा तक जाने का रास्ता

माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए अभी जिस रास्ते का इस्तेमाल किया जाता है, वह गुफा में प्रवेश का प्राकृतिक रास्ता नहीं है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए नए रास्ते का निर्माण 1977 में किया गया था। वर्तमान में इसी रास्ते से श्रद्धालु माता के दरबार में पहुंचते हैं।

कभी-कभी प्राचीन गुफा से भी होते हैं दर्शन

यहां एक नियम ये है कि जब मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या दस हजार के कम होती है, तब प्राचीन गुफा का द्वार खोल दिया जाता है और भक्त पुराने रास्ते से माता के दरबार तक पहुंच सकते हैं। ये सौभाग्य बहुत कम भक्तों को मिल पाता है। आमतौर पर जनवरी-फरवरी में यहां आने वाले भक्तों की संख्या काफी कम हो जाती है, इस कारण इन दिनों में प्राचीन गुफा भक्तों के लिए खोल दी जाती है।

प्राचीन गुफा की मान्यता

मां माता वैष्णो देवी के दरबार में प्राचीन गुफा का महत्व काफी अधिक है। यहां प्रचलित मान्यता के अनुसार पुरानी गुफा में भैरव का शरीर मौजूद है। माता ने यहीं पर भैरव को अपने त्रिशूल से मारा था और उसका सिर उड़कर भैरव घाटी में चला गया और शरीर इस गुफा में रह गया था। प्राचीन गुफा का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि इसमें पवित्र गंगा जल प्रवाहित होता रहता है। वैष्णो देवी मंदिर तक पहुंचने के लिए कई पड़ाव पार करने होते हैं। इन पड़ावों में से एक है आदि कुंवारी या आद्यकुंवारी। यहीं एक और गुफा भी है, जिसे गर्भजून के नाम से जाना जाता है। गर्भजून गुफा को लेकर मान्यता है कि माता यहां 9 महीने तक उसी प्रकार रही थी जैसे एक शिशु माता के गर्भ में 9 महीने तक रहता है। गर्भजून गुफा के बारे में कहा जाता है कि इस गुफा से होकर जाने से व्यक्ति को फिर से गर्भ में नहीं आना पड़ता है यानी उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। अगर व्यक्ति का दोबारा जन्म होता भी है तो उसे कष्ट नहीं उठाना पड़ते हैं। उसका जीवन सुखी रहता है।

कैसे पहुंच सकते हैं वैष्णो देवी मंदिर

हवाई मार्ग

हवाई मार्ग से वैष्णो देवी मंदिर पहुंचना चाहते हैं तो आपको पहले जम्मू के रानीबाग एयरपोर्ट पहुंचना होगा। ये वैष्णो देवी का नजदीकी एयरपोर्ट है। इसके बाद सड़क मार्ग से वैष्णो देवी के बेस कैंप कटरा पहुंचना होगा। यहां से पैदल या टैक्सी की मदद से भी मंदिर तक पहुंच सकते हैं।

रेल मार्ग

वैष्णो देवी मंदिर के पास दो रेलवे स्टेशन हैं, एक है जम्मू और दूसरा है कटरा। देशभर के सभी मुख्य शहरों से जम्मू के रेल सुविधा मिल सकती है। वैष्णो देवी का बेस कैंप कटरा भी अब एक रेलवे स्टेशन बन गया है। कटरा के बाद मंदिर तक चढ़ाई है। आप पैदल या टट्टू या पालकी की मदद से मंदिर तक पहुंच सकते हैं।

सड़क मार्ग

देश के सभी प्रमुख शहरों से जम्मू सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। जम्मू से कटरा तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

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