रविवार और पूर्णिमा का योग / सुबह जल्दी उठकर तांबे के लोटे से सूर्य को चढ़ाएं जल, बोलें सूर्यदेव के मंत्र



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  • ज्योतिष में सूर्यदेव को मान-सम्मान का कारक माना गया है, इनकी पूजा से बुद्धि तेज होती है

Dainik Bhaskar

Jun 14, 2019, 06:04 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। रविवार, 16 जून को ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा है। इस तिथि पर वट सावित्री व्रत किया जाता है। विवाहित महिलाओं के लिए इस पर्व का महत्व काफी अधिक है। महिलाएं अपने पति के सौभाग्य, स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए ये व्रत करती हैं। इस दिन वट वृक्ष की पूजा करने की परंपरा है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार रविवार और पूर्णिमा का योग होने से इसका महत्व काफी अधिक बढ़ गया है। रविवार का स्वामी ग्रह सूर्य है। ज्योतिष में सूर्य को मान-सम्मान का कारक माना गया है। कुंडली में सूर्य की शुभ-अशुभ स्थिति का अच्छा या बुरा असर हमारी बुद्धि पर भी होता है। सूर्य की शुभ स्थिति समाज में मान-सम्मान भी दिलवाती है। सूर्य से शुभ फल पाने के लिए रविवार और पूर्णिमा के योग में सूर्य की भी विशेष पूजा करनी चाहिए। इस दिन के बाद से नियमित रूप से सूर्य को जल चढ़ाना शुरू करें। जानिए कैसे कर सकते हैं सूर्य की पूजा...

सूर्य पूजा से जुड़ी खास बातें

  1. रविवार और पूर्णिमा के योग में सुबह जल्दी उठें। स्नान के बाद सूर्यदेव को जल अर्पित करें। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरें, चावल, फूल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें।

  2. जल चढ़ाते समय ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें।

  3. जल चढ़ाने के बाद सूर्य मंत्र स्तुति का पाठ करें। इस पाठ के साथ शक्ति, बुद्धि, स्वास्थ्य और सम्मान की कामना से करें।

  4. सूर्य की पूजा में धूप, दीप जलाकर से सूर्यदेव की आरती करें।

  5. सूर्य से संबंधित चीजें जैसे तांबे का बर्तन, पीले या लाल वस्त्र, गेहूं, गुड़, माणिक्य, लाल चंदन आदि का दान करें। अपनी श्रद्धानुसार इन चीजों में से किसी भी चीज का दान किया जा सकता है।

  6. सूर्य के निमित्त व्रत करें। एक समय फलाहार करें और सूर्यदेव की पूजन करें।

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