रोज करनी चाहिए पूजा, इससे मन को मिलती है शांति, लेकिन कुछ नियमों का पालन करना भी है जरूरी, वरना अधूरी मानी जाती है पूजा / रोज करनी चाहिए पूजा, इससे मन को मिलती है शांति, लेकिन कुछ नियमों का पालन करना भी है जरूरी, वरना अधूरी मानी जाती है पूजा

सभी देवी-देवताओं के साथ ही कुल देवी और कुल देवता की पूजा करना न भूलें

dainikbhaskar.com

Nov 10, 2018, 04:57 PM IST
we should worship to kul devi and kul devta for happiness, rules for worship

रिलिजन डेस्क। अधिकतर लोग रोज पूजा-पाठ करते हैं, एक अनिवार्य परंपरा है। शास्त्रों की मान्यता है कि जिन घरों में नियमित रूप से पूजा की जाती है, वहां देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है और जीवन में परेशानियां नहीं आती हैं। पूजा के संबंध में कई नियम भी बताए गए हैं, जिनका पालन करने पर भगवान जल्दी प्रसन्न हो सकते हैं और हमारी मनोकामनाएं पूरी कर सकते हैं। यहां जानिए उज्जैन के इंद्रेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी पं. सुनील नागर के अनुसार पूजा करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए...

> किसी भी प्रकार के पूजन में कुल देवता, कुल देवी, घर के वास्तु देवता, ग्राम देवता आदि का ध्यान करना आवश्यक है।

> पूजन में चावल विशेष रूप से अर्पित किए जाते हैं। पूजन के लिए ऐसे चावल का उपयोग करना चाहिए जो खंडित या टूटे हुए ना हो। चावल चढ़ाने से पहले इन्हें हल्दी से पीला कर लेना चाहिए। पानी में हल्दी घोलकर उसमें चावल को डूबो कर पीला किया जा सकता है।

> पूजन में पान का पत्ता भी अर्पित किया जाता है। ध्यान रखें कि केवल पान का पत्ता अर्पित ना करें, इसके साथ इलाइची, लौंग, गुलकंद आदि भी चढ़ाना चाहिए। पूरा बना हुआ पान अर्पित करेंगे तो श्रेष्ठ रहेगा।

> देवी-देवताओं के सामने घी और तेल, दोनों के ही दीपक जलाने चाहिए। यदि आप प्रतिदिन घी का दीपक घर में जलाएंगे तो घर के कई वास्तु दोष दूर हो जाएंगे।

> पूजन में हम जिस आसन पर बैठते हैं, उसे पैरों से इधर-उधर खिसकाना नहीं चाहिए। आसन को हाथों से ही खिसकाना चाहिए।

> किसी भी भगवान के पूजन में उनका आवाहन करना, ध्यान करना, आसन देना, स्नान करवाना, धूप-दीप जलाना, अक्षत, कुमकुम, चंदन, पुष्प, प्रसाद आदि अनिवार्य रूप से होना चाहिए।

> देवी-देवताओं को हार-फूल, पत्तियां आदि अर्पित करने से पहले एक बार साफ पानी से जरूर धो लेना चाहिए।

> घर में या मंदिर में जब भी कोई विशेष पूजा करें तो इष्टदेव के साथ ही स्वस्तिक, कलश, नवग्रह देवता, पंच लोकपाल, षोडश मातृका, सप्त मातृका का पूजन अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए।

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