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स्वयंवर में कर्ण ने उठा लिया था धनुष, तभी द्रौपदी ने उससे विवाह करने से मना कर दिया

3 वर्ष पहले
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  • दुर्योधन भी गया था स्वयंवर में, लेकिन लक्ष्य भेदने की कोशिश नहीं की

जीवन मंत्र डेस्क। महाभारत में राजा द्रुपद ने अपनी पुत्री द्रौपदी के विवाह के लिए  स्वयंवर का आयोजन किया। इस स्वयंवर में कई राजाओं ने भाग लिया था। स्वयंवर की शर्त यह थी कि वहां रखे धनुष को उठाकर पर प्रत्यंचा चढ़ानी थी और नीचे पानी में देखकर ऊपर छत पर घूम रही मछली की आंख का निशाना लगाना था। सभी चाहते थे कि वे द्रौपदी से विवाह करें, क्योंकि राजकुमारी बहुत ही सुंदर थी और उसके पिता यानी राजा द्रुपद शक्तिशाली राजा थे। स्वयंवर में श्रीकृष्ण भी उपस्थित थे और वेष बदलकर सभी पांडव भी यहां पहुंचे थे।

  • धृतराष्ट्र पुत्र दुर्योधन भी इस स्वयंवर में गया था, लेकिन उसके मन में शंका थी कि वह स्वयंवर की शर्त पूरी नहीं कर सका तो सभी राजाओं के सामने उसे अपमानित होना पड़ेगा। इस डर से उसने प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया। उसने लक्ष्य भेदने की कोशिश ही नहीं की। वहां कर्ण भी उपस्थित था।
  • जब-जब कोई राजा इस प्रतियोगिता की ओर आगे बढ़ता तो द्रौपदी श्रीकृष्ण की ओर देखती थी, ताकि उसे ये मालूम हो सके कि राजा विवाह योग्य है या नहीं। स्वयंवर में कर्ण आगे बढ़ा और उसने धनुष उठाकर उस प्रत्यंचा चढ़ा दी। श्रीकृष्ण जानते थे कि कर्ण स्वयंवर की शर्त पूरी कर सकता है, उन्होंने द्रौपदी को इशारा कर दिया कि ये तुम्हारे लिए उपयुक्त वर नहीं है। इशारा मिलते ही द्रौपदी ने घोषणा कर दी कि वह किसी सूत से विवाह नहीं कर सकती।
  • ये सुनते ही द्रौपदी के भाई धृष्टधुम्न ने कर्ण से कह दिया कि मेरी बहन आपसे विवाह नहीं करना चाहती आप प्रतियोगिता में हिस्सा न लें। ये सुनकर कर्ण ने खुद को अपमानित महसूस किया और क्रोधित होकर वहां से चला गया।
  • इसके बाद ब्राह्मण के रूप में उपस्थित अर्जुन में प्रतियोगिता की शर्त पूरी की और द्रौपदी से विवाह किया।
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