गीता का ज्ञान / अज्ञानी, हमेशा शंका में रहने वाला ऐसे 3 तरह के लोग जो जल्दी ही नष्ट हो जाते हैं



Bhagwad gita lord krishna and arjun 3 type of get problems in their life
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Bhagwad gita lord krishna and arjun 3 type of get problems in their life

  • गीता के उपदेश में भगवान कृष्ण ने अर्जुन को बताई है ज्ञान की बातें जो सबके लिए उपयोगी हैं 
  • तीन दुर्गुणों में से एक भी किसी में हो तो उसका विनाश जल्दी हो जाता है

Dainik Bhaskar

Oct 09, 2019, 04:46 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क. सुख और दुख हमारे द्वारा किए गए कर्मों का ही फल है। अत: वर्तमान में हमें ऐसे कर्म करना चाहिए, जिनसे भविष्य में सुख प्राप्त किया जा सके। ऐसे कर्मों और भावों से बचना चाहिए, जिनसे व्यक्ति नष्ट हो जाता है। श्रीमद्भगवद् गीता में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को तीन ऐसे पुरुषों के विषय में बताया है जो भविष्य में नष्ट हो जाते हैं। इन्हें न सुख मिलता है और न ही कभी शांति मिल पाती है।

 

श्रीकृष्ण कहते हैं कि-

अज्ञश्चाश्रद्दधानश्च संशयात्मा विनश्यति।
नायं लोकोऽस्ति न परो न सुखं संशयात्मन:।।

 

इस श्लोक में श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा है कि जो पुरुष अज्ञ यानी आत्म ज्ञान से हीन है, अज्ञानी है, धर्म नहीं जानता है, उपदेशों का पालन नहीं करता है, वह बहुत ही जल्दी नष्ट हो जाता है। अज्ञानी व्यक्ति कभी भी सफलता और शांति प्राप्त नहीं कर पाता है। अज्ञान के कारण ही दुखों में वृद्धि होती रहती है। अत: हमेशा अज्ञान को दूर करने के प्रयास करते रहना चाहिए। ज्ञान प्राप्त करते रहने से कल्याण हो जाता है।

 

नष्ट होना वाला दूसरा व्यक्ति वह है जो ज्ञान की वृद्धि करने वाले उपायों में श्रद्धा नहीं रखता है। जो व्यक्ति उपदेश देने वाले ज्ञानी लोगों के प्रति हीन भावना रखता है, भगवान के प्रति श्रद्धा नहीं रखता है, वह इंसान बहुत ही जल्दी नष्ट हो सकता है। भगवान की कृपा के बिना व्यक्ति का कल्याण नहीं हो पाता है, ऐसे लोग कभी सुख प्राप्त नहीं कर पाते हैं। यदि हम परमात्मा पर विश्वास रखते हुए सही काम करेंगे तो सफलता मिलने की संभावनाएं काफी बढ़ जाती हैं।

 

तीसरा व्यक्ति वह है जो हमेशा संशय में रहता है। जो पुरुष सदैव शंका में रहते हैं और कर्मों के लिए सोचते हैं कि सफलता मिलेगी या नहीं। काम होगा या नहीं। ये काम करूं या ना करूं। जो लोग भगवान की भक्ति के संबंध में भी संशय रखते हैं, वे नष्ट हो जाते हैं। संशय करने वाले व्यक्ति का मन कभी भी शांत नहीं रहता है। शंका का कोई समाधान नहीं है। अत: इस भावना से जितनी जल्दी हो सके, मुक्ति पा लेनी चाहिए। कोई भी काम एक मन बनाकर शुरू कर देना चाहिए। कर्म करना हमारे वश में हैं, कर्म के फल के विषय में सोचने या शंका करने से असफलता मिलने की संभावनाएं बढ़ती हैं।

 

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