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हिंदू धर्म में है भगवान को भोग लगाने की परंपरा, कुछ खास अवसरों पर भगवान को 56 भोग भी लगाए जाते हैं

भगवान को 56 भोग लगाने की परंपरा के पीछे क्या कारण है?

Dainik Bhaskar

Dec 08, 2018, 08:33 PM IST

रिलिजन डेस्क। हिंदू धर्म में भगवान को भोग लगाने की परंपरा भी है। कुछ विशेष अवसरों पर भगवान को 56 भोग लगाया जाता है। 56 भोगों को लेकर आज तक काफी कुछ लिखा गया है और लोग भी बड़ी श्रद्धा से इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं। क्या कारण है कि भगवान को 56 भोग ही लगाए जाते हैं, इससे कम या ज्यादा नहीं। इस परंपरा के पीछे बहुत से दार्शनिक कारण हैं, जो इस प्रकार हैं...


इसलिए भगवान को लगाते हैं 56 भोग...
- विद्वानों के अनुसार, भगवान विष्णु के अनेक आसन हैं, कमल भी उनमें से एक है। जिस कमल पर भगवान विष्णु विराजित हैं, उसकी पंखुड़ियों की संख्या 56 है।

- यह तीन चरणों में है, पहले में 8, दूसरे में 16 और तीसरे में 32 पंखुडिय़ां होती हैं। इसी लिए भगवान को 56 भोग लगाए जाते हैं।
- भगवान को 56 भोग लगाने का कारण दूसरा दार्शनिक कारण ये भी है कि धर्म ग्रंथों में प्राणी की 84 लाख योनियां बताई गई हैं, जिसमें से श्रेष्ठ है मनुष्य योनि।

- अगर मनुष्य योनि को अलग कर दिया जाए तो 83,99,999 संख्या होती है। ये सारी योनियां पशु-पक्षी की हैं। इनको जोड़ने पर योग 56 होता है।
- विद्वानों का मानना है कि मनुष्य जन्म को छोड़कर शेष जन्मों से मुक्ति पाने के लिए ही हम 56 भोग का प्रसाद भगवान को लगाते हैं। यह मानकर कि हमने अपने शेष 83,99,999 जन्म भगवान को अर्पित कर दिए हैं।

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