मकर संक्रांति / इस दिन तिल और गुड़ खाने के अलावा पतंग उठाने का है खास महत्व, इसके पीछे है वैज्ञानिक कारण

Dainik Bhaskar

Jan 10, 2019, 03:43 PM IST


importance of makar sankaranti according to science
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importance of makar sankaranti according to science

रिलिजन डेस्क. मकर संक्रांति पर्व पर सूर्य देव की उपासना की जाती है। इस दिन सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश करता है इसलिए इस दिन को 'मकर संक्रांति' कहते हैं। इस दिन सूर्य उत्तर दिशा की ओर बढ़ने लगता है जिससे दिन बड़े होने लगते हैं और रात छोटी होनी शुरू हो जाती है। भारत में इस दिन से वसंत ऋतु की शुरुआत हो जाती है। इसीलिए इस त्योहार को सुख-समृद्धि का प्रतीक भी मना जाता है। इस दिन तिल और गुड़ खाने और पतंग उठाने का खास महत्व है, लेकिन क्या आप को मालूम है कि इन परंपराओं की शुरुआत कैसे हुई।

इस त्योहार से जुड़ी खास बातें

  1. इस दिन तिल और गुड़ खाने का है महत्व

    अगर वैज्ञानिक आधार की बात करें तो तिल के सेवन से शरीर गर्म रहता है और इसके तेल से शरीर को भरपूर नमी भी मिलती है। दरअसल सर्दियों में शरीर का तापमान गिर जाता है। ऐसे में हमें बाहरी तापमान से अंदरुनी तापमान को बैलेंस करना होता है। तिल और गुड़ गर्म होते हैं, ये खाने से शरीर गर्म रहता है। इसलिए इस त्योहार में ये चीजें खाई और बनाई जाती हैं। तिल में कॉपर, मैग्नीशियम, ट्राइयोफान, आयरन, मैग्नीज, कैल्शियम, फास्फोरस, जिंक, विटामिन बी 1 और रेशे प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। एक चौथाई कप या 36 ग्राम तिल के बीज से 206 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है। तिल में एंटीऑक्सीडेंट गुण भी पाए जाते हैं। ितल शरीर में उपस्थित जीवाणुओं और कीटाणुओं का दमन करता है।

  2. इस दिन पतंग क्यों उड़ाते हैं?

    यह समय सर्दी का होता है और इस मौसम में सुबह का सूर्य प्रकाश शरीर के लिए स्वास्थ्यवर्धक होता है तथा ये त्वचा व हड्डियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसीलिए इस दिन पतंग उड़ाई जाती है जिससे कि सूर्य किरणों का लाभ शरीर को मिले। वहीं पौराणिक महत्व के अनुसार माना जाता है कि इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनिदेव से नाराजगी त्यागकर उनके घर गए थे इसलिए इस दिन को सुख और समृद्धि का दिन भी माना जाता है।

  3. मकर संक्रांति के हैं और भी कई नाम

    दक्षिण भारत में इस त्योहार को पोंगल के रूप में मनाया जाता है। उत्तर भारत में इसे लोहड़ी कहा जाता है। मध्यभारत में इसे संक्रांति कहा जाता है। मकर संक्रांति को उत्तरायण, माघी, खिचड़ी आदि नाम से भी जाना जाता है।

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