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हनुमानजी का लघु रूप देख माता सीता ने कहा कि- वानर तो इतने छोटे होते हैं, वे भला इतने बलवान राक्षसों से कैसे लड़ पाएंगे। सीताजी की बात सुनकर हनुमानजी ने दिया ये जवाब / हनुमानजी का लघु रूप देख माता सीता ने कहा कि- वानर तो इतने छोटे होते हैं, वे भला इतने बलवान राक्षसों से कैसे लड़ पाएंगे। सीताजी की बात सुनकर हनुमानजी ने दिया ये जवाब

Dainik Bhaskar

Dec 07, 2018, 05:00 PM IST

अपनी शक्ति का प्रदर्शन कब और कैसे करना है, सीखिए हनुमानजी से

Life Management, Hanumanji, Goddess Sita, Life Management of Sunderkand
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रिलिजन डेस्क। वर्तमान समय में हर आदमी को किसी न किसी बात का अहंकार हो ही जाता है। वो ये बात भूल जाता है कि अहंकार के कारण कई बार बने काम भी बिगड़ जाते हैं। आदमी यह भूल गया है कि उसे खुद को कहां बड़ा दिखाना है और कहां छोटा। सुंदरकांड के एक प्रसंग में हनुमानजी ने ये बताया है कि हमें कब अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना चाहिए...


ये है पूरा प्रसंग...
हनुमानजी जब समुद्र पार कर लंका में पहुंचे तो पहले तो उन्होंने सीता माता की खोज की। जब सीता माता से हनुमानजी मिले तो उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम जल्दी ही वानरों की सेना लेकर लंका पर आक्रमण करेंगे।
हनुमानजी सीताजी को धैर्य बंधा रहे थे, लेकिन उनका आत्मविश्वास लौट नहीं रहा था। हनुमानजी ने कहा- मां आप भरोसा रखें। प्रभु श्रीराम आएंगे और आपको ले जाएंगे। वैसे तो मैं आपको यहां से ले जा सकता हूं किंतु श्रीराम की ऐसी आज्ञा नहीं है।
तब सीताजी ने कहा कि- राक्षस बहुत बलवान हैं और वानर तुम्हारी तरह छोटे-छोटे होंगे, तुम उनसे जीत नहीं पाओगे। इतना सुनते ही हनुमानजी ने अपने शरीर को पर्वत के समान विशाल कर लिया। हनुमानजी का ऐसा स्वरूप देखकर सीताजी के मन में विश्वास हो गया।
इसके तुरंत बाद हनुमानजी अपने मूल स्वरूप में लौट आए। उन्हें लगा कि कहीं माता सीता यह न समझ लें कि मैं अपनी बढ़ाई कर रहा हूं। यहां तुलसीदासजी ने लिखा है-

सुनु माता साखामृग नहिं बल बुद्धि बिसाल
प्रभु प्रताप तें गरुड़हि खाइ परम लघु ब्याल

अर्थ- हे माता सुनो, वानरों में बहुत बल-बुद्धि नहीं होती। परंतु प्रभु के प्रताप से बहुत छोटा सर्प भी गरुड़ को खा सकता है।

यहां हनुमानजी ने अपने शक्ति को परिचय तो दिया, लेकिन उसे परमात्मा से जोड़ दिया। इस तरह अपनी बढ़ाई और श्रेष्ठता को जो लोग परमात्मा से जोड़ देते हैं उन्हें अहंकार नहीं आता। हमें यही बात हनुमानजी से सीखनी चाहिए कि हम में भले ही कितनी भी काबिलियत हो, लेकिन अहंकार न करें।

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