ज्योतिर्लिंग / सावन के पहले दिन त्र्यंबकेश्वर, महाकालेश्वर, काशी विश्वनाथ और ओंकारेश्वर से सीधे दर्शन



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  • सावन में शिव मंदिर और ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का पौराणिक महत्व है

Dainik Bhaskar

Jul 17, 2019, 12:01 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क. आज से सावन मास शुरू हो गया है। सावन महीने के पहले दिन दैनिक भास्कर प्लस एप आपके लिए लाया है देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से 4 ज्योतिर्लिंगों के सीधे दर्शन के वीडियो। मध्यप्रदेश के उज्जैन से महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, खंडवा से ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, महाराष्ट्र के नासिक से त्र्यंबकेश्वर और बनारस से काशी विश्वनाथ के सीधे दर्शन।

 

(आगे की स्लाइड्स में देखें  - ओंकारेश्वर, त्र्यंबकेश्वर और काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के वीडियो)

 

1) महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, उज्जैन, मध्य प्रदेश 

मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में स्थापित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग दुनिया का एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। पौराणिक मान्यता है कि भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नाम के राक्षस को जब युद्ध में हराया था, तब ब्रह्मा जी ने इस शहर का नाम उज्जयिनी रखा था, यहां भगवान शिव स्वयंभू शिवलिंग के रूप में स्थापित हुए। उज्जैन को काल गणना का क्षेत्र भी माना गया है। संसार में एकमात्र महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग ही ऐसा मंदिर है, जहां सुबह ब्रह्म मुहूर्त में भगवान को आरती के साथ भस्म चढ़ाई जाती है, इसे भस्मारती कहते हैं। दुनियाभर से लोग इस आरती के दर्शन करने आते हैं।

 

 

2) ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, खंडवा, मध्यप्रदेश 

 

12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ओंकारेश्वर मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में नर्मदा नदी के किनारे स्थापित है। यहां भगवान का एक नाम ममलेश्वर भी है। शिव पुराण की कथाओं के मुताबिक राजा मान्धाता ने यहां घोर तपस्या करके भगवान शिव को प्रसन्न किया था। जब शिव जी प्रसन्न होकर मान्धाता के सामने प्रकट हुए तो मान्धाता ने शिव से इसी क्षेत्र में निवास करने का वरदान मांग लिया। इसी कारण भगवान यहां ओंकार रूप में स्थापित हो गए।

 

 

3) त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग, नासिक, महाराष्ट्र

 

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के नासिक में गोदावरी नदी के तट पर स्थापित है। नासिक में ही गोदावरी नदी का उद्मम स्थान है। गोदावरी को दक्षिण भारत और उत्तर भारत की सीमा रेखा माना जाता है। पौराणिक कथा है कि इस स्थान पर गौतम ऋषि और गोदावरी ने सामूहिक रूप से तपस्या कर शिव को प्रसन्न किया था। उन्हीं की तपस्या के फलस्वरूप यहां शिव त्र्यंबकेश्वर रूप में स्थापित हुए। इस स्थान को पितृ और कालसर्प दोषों से मुक्ति का स्थान माना जाता है। 

 

4) काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग, बनारस

 

काशी को दुनिया के सात सबसे पुराने शहरों में से एक माना गया है। काशी को भगवान शिव का घर भी माना गया है। यहां भगवान शिव के आदेश से ही कालभैरव ने अपनी स्थापना की थी। गंगा नदी के तट पर बसा बनारस शहर वाराणसी और काशी के नाम से भी जाना जाता है। यहां की पौराणिक संस्कृति और वैदिक ज्ञान आज भी दुनियाभर में प्रसिद्ध है। इस जगह भगवान शिव विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हैं।

 

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