Hanuman Mantra : अगर बेवजह मन में रहता है डर या आत्मविश्वास की कमी लगती है, तो शरीर के अनाहत चक्र में होती है परेशानी, हनुमान मंत्र का निरंतर ध्यान और जाप करने बढ़ता है आत्म विश्वास

मेडिटेशन के साथ हनुमान मंत्र का इस तरह से करें जाप, रखें ये सावधानियां

Dainikbhaskar.com

Mar 16, 2019, 05:38 PM IST
Lord Hanuaman Mantra right process of chanting hanuman chalisa and mantra

रिलिजन डेस्क. भगवान हनुमान की भक्ति हर तरह से शुभ मानी जाती है। असंभव काम को संभव करने की शक्ति हनुमान देते हैं। वास्तव में हनुमान भगवान सूर्य के शिष्य हैं। सूर्य को आत्मविश्वास बढ़ाने वाला ग्रह माना जाता है। शारीरिक तेज और मानसिक दृढ़ता सूर्य देते हैं। इसी तरह भगवान हनुमान भी चालीसा से लेकर मंत्र तक के जाप से व्यक्ति को आत्मविश्वास का वरदान देते हैं। शास्त्रों का मानना है कि भगवान हनुमान मानव शरीर में मौजूद क्षमताओं के प्रतीक हैं।

हनुमान जी को प्रसन्न करने के कई मंत्र हैं लेकिन हनुमान गायत्री मंत्र कुछ अलग महत्व रखते हैं। जिस तरह गायत्री मंत्र को भगवान से शुद्ध बुद्धि मांगने के लिए पढ़ा जाता है, वैसे ही हनुमान गायत्री मंत्र को मानसिक शांति और आत्मविश्वास देने वाला मंत्र माना जाता है। अगर तनाव हो या कोई चिंता हो तो इस मंत्र के जाप से उसे काफी हद तक कम किया जा सकता है। इस मंत्र के स्वर से हमारे शरीर के अनाहत चक्र पर सीधा असर होता है। ये चक्र हृदय के निकट स्थित होता है। इससे अकारण लगने वाला डर और घबराहट भी कम होते हैं। योग में भी इस बात को इसी तरह स्वीकार किया है।

ये हैं हनुमान गायत्री मंत्र

मंत्र - 1

ऊँ रामदूताय् विद्महे, कपिराजाय धीमहि, तन्नो हनुमत् प्रचोदयात।

मंत्र - 2

ऊँ आंजनेयाय् विद्महे, महाबलाय् धीमहि तन्नो मारुतिः प्रचोदयात।

मंत्र - 3

ऊँ अंजनिसुताय् विद्महे, वायुपुत्राय् धीमहि तन्नो मारुतिः प्रचोदयात्।

इस तरह करें जाप

1 . जाप प की शुरुआत के लिए सही दिन मंगलवार और शनिवार है। इन दोनों में से किसी एक दिन इसकी शुरुआत कर सकते हैं।

2 . शुद्ध शरीर और मन के साथ किसी हनुमान मंदिर में बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। भगवान हनुमान को गुड़ और चने का भोग अर्पित करें।

3 . इसके बाद तीन हनुमान गायत्री मंत्रों में से किसी एक का नियमित जाप शुरू करें। जाप रुद्राक्ष की माला से किया जा सकता है। रोज कम से कम 108 बार।

4 . जाप करते समय अपना ध्यान सीने के मध्य अनाहत चक्र पर रखें।

5 . एक बार मंदिर में शुरू करने के बाद इस मंत्र का जाप आप नियमित रूप से घर पर रोज सुबह करें।

6 . मंत्र जाप को बीच में ना छोड़े, ध्यान शरीर के अनाहत चक्र, जो हृदय के पास श्वास और आहार नली के ऊपर होता है, वहीं रखें।

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