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जय-विजय थे बैकुंठ के द्वारपाल, उन्होंने कर दिया था मुनियों का अपमान, श्राप के कारण 3 बार लेना पड़ा धरती पर जन्म, हर बार भगवान विष्णु ने किया उनका वध / जय-विजय थे बैकुंठ के द्वारपाल, उन्होंने कर दिया था मुनियों का अपमान, श्राप के कारण 3 बार लेना पड़ा धरती पर जन्म, हर बार भगवान विष्णु ने किया उनका वध

Dainik Bhaskar

Dec 08, 2018, 06:45 PM IST

विष्णुजी के पहले अवतार के कारण ही रावण-कुंभकर्ण ने लिया धरती पर जन्म

Lord Vishnu, incarnation of Lord Vishnu, first incarnation of Vishnu, Ravana, Kumbhakarna
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रिलिजन डेस्क। बहुत से लोग भगवान विष्णु के प्रमुख 10 अवतारों के बारे में ही जानते हैं, लेकिन श्रीमद्भागवत में भगवान विष्णु के कुल 24 अवतार बताए गए हैं। इनसे से कुछ अवतार ऐसे भी हैं, जिनके बारे में कम ही लोग जानते हैं। आज हम आपको भगवान विष्णु के पहले अवतार के बारे में बता रहे हैं...

ये 4 बाल मुनि हैं विष्णुजी के पहले अवतार…
श्रीमद्भागवत के अनुसार, सृष्टि के आरंभ में ब्रह्माजी ने अनेक लोकों की रचना करने की इच्छा से घोर तपस्या की। उनके तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार नाम के चार मुनियों के रूप में अवतार लिया। ये भगवान विष्णु के सर्वप्रथम अवतार माने जाते हैं।


इन्होंने ही दिया था जय-विजय को श्राप…
भगवान विष्णु के जय-विजय नाम के दो द्वारपाल थे, जो सदैव वैकुंठ के द्वार पर खड़े रहकर श्रीहरि की सेवा करते थे। एक बार सनकादि मुनि भगवान विष्णु के दर्शन करने वैकुंठ आए। जब सनकादि मुनि द्वार से होकर जाने लगे तो जय-विजय ने हंसी उड़ाते हुए उन्हें बेंत अड़ाकर रोक लिया। क्रोधित होकर सनकादि मुनि ने उन्हें तीन जन्मों तक राक्षस योनी में जन्म लेने का श्राप दे दिया। क्षमा मांगने पर सनकादि मुनि ने कहा कि तीनों ही जन्म में तुम्हारा अंत स्वयं भगवान श्रीहरि करेंगे।
इस प्रकार तीन जन्मों के बाद तुम्हें मोक्ष की प्राप्ति होगी। पहले जन्म में जय-विजय ने हिरण्यकशिपु व हिरण्याक्ष के रूप में जन्म लिया। भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर हिरण्याक्ष का तथा नृसिंह अवतार लेकर हिरण्यकशिपु का वध कर दिया। दूसरे जन्म में जय-विजय ने रावण व कुंभकर्ण के रूप में जन्म लिया। इनका वध करने के लिए भगवान विष्णु को राम अवतार लेना पड़ा। तीसरे जन्म में जय-विजय शिशुपाल और दंतवक्र के रूप में जन्मे। इस जन्म में भगवान श्रीकृष्ण ने इनका वध किया।

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