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कुंभ 2019 / प्रयागराज के प्रमुख मंदिर, जहां कुंभ स्नान के बाद जरूर जाएं दर्शन करने

Dainik Bhaskar

Jan 12, 2019, 11:20 AM IST


main temple of prayagraj where to go after the kumbh bath
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main temple of prayagraj where to go after the kumbh bath

रिलिजन डेस्क. इस साल 15 जनवरी से प्रयागराज में कुंभ पर्व की शुरूआत होगी। इसमें शामिल होने और संगम में आस्था की डूबकी लगाने के लिए न केवल पूरे देश बल्कि विदेश से भी लोग पहुंचते हैं। प्रयागराज में संगम के अलावा भी कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जिनके दर्शन आपको जरूर करने चाहिए। प्रयागराज को तीर्थराज के नाम से भी जाना जाता है। यहां के तीर्थ स्थल उंगलियों पर गिनने मुश्किल हैं लेकिन कुछ ऐसे स्थल हैं जहां आपको जरूर जाना चाहिए। प्राचीन संगम नगरी है तो जाहिर हैं यहां के मंदिर और अन्य तीर्थ स्थल भी उतने ही पुराने होंगे। यहां के मंदिर की प्राचीनता और महातम को अगर आपको समझना है तो यहां आना होगा। आइए प्रयागराज के कुछ महत्वपूर्ण मंदिरों के बारे में जानें जहां जाना जरूर चाहिए।
 

अक्षय वट

  1. अकबर के किले में प्रसिद्ध अक्षय वट मौजूद है। मान्यता है  कि गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम की वजह से ही इस अक्षय वट की उत्पत्ति हुई है। मान्यता है कि इसके दर्शन के बाद ही संगम पर स्नान करने वालों के सभी संकल्प पूरे होते हैं। यह बरगद का बहुत पुराना पेड़ है। सुरक्षा के बीच संगम के निकट किले में अक्षय वट की एक डाल के दर्शन कराए जाते हैं। पूरा पेड़ कभी नहीं दिखाया जाता।
     

  2. बड़े हनुमान जी या लेटे हनुमान जी का मंदिर

    संगम किनारे हनुमान जी का एक अनूठा मन्दिर है। इस मंदिर में बजरंग बलि की लेटी हुई प्रतिमा की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि हर साल बारिश के समय में गंगा जी का जल किनारों को पार करते हुए इस मंदिर तक आता है और हनुमान जी के चरणों का स्पर्श करने के बाद बाढ़ का पानी आगे नहीं बढ़ता और वहीं से लौटने लगता है।
     

  3. मानामेश्वर मंदिर

    यमुना किनारे भगवान शिव के मानामेश्वर मंदिर हजारों साल पुराना है इस मंदिर का उल्लेख पुराणों में भी किया गया है। मंदिर के बारे में ऐसी मान्यता है कि सावन माह के हर सोमवार को जहां जलाभिषेक और पूजा अर्चना करने से श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूर्ण होती है और मनोवांछित फल मिलता है।

  4. शंकर विमान मंडपम्

    यहां दक्षिण शैली में बना 130 फुट ऊंचा शंकर विमान मंडपम् मंदिर भी बहुत प्रसिद्ध है। ऐसी मान्यता है कि आदि गुरू शंकराचार्य से प्रसिद्ध दर्शनशास्त्री कुमारिल भट्ट की मुलाकात यहीं हुई थी। इसी भेंट को अमर करने के लिए इस मंदिर को बनाया गया।

  5. भारद्वाज मुनि का आश्रम

    इलाहाबाद के मौहल्ले कर्नलगंज में ऋषि भारद्वाज का आश्रम है। यह आनंद भवन के पास ही है। प्राचीन काल में जब वर्तमान संगम का बांध नहीं बना था तो गंगा यमुना का संगम यहीं हुआ करता था। मुख्य मंदिर के अलावा यहां कई और देवी देवताओं के मंदिर हैं।

  6. सोमेश्वर मंदिर

    तीर्थराज प्रयाग के यमुना तट पर स्थित प्राचीन भगवान शिव का सोमेश्वर नाथ मंदिर भी है। सोमेश्वर नाथ भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। ऐसी मान्यता है कि भगवान शंकर के कहने पर चंद्रमा ने यहां भगवान शिव की स्थापना की थी। इसके अलावा मंदिर को लेकर एक मान्यता यह भी है कि इस मंदिर के आस पास अमृत की वर्षा होती है और मंदिर पर विराजित त्रिशूल की दिशा भी चन्दमा के साथ बदलती है। 

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